फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 27 फरवरी 2026 कलेक्ट्रेट सभागार, फतेहगढ़ में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
जनवरी में बढ़ीं सड़क दुर्घटनाएं
एआरटीओ द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में जनपद में 42 सड़क दुर्घटनाओं में 26 लोगों की मृत्यु हुई, जबकि जनवरी 2025 में 24 दुर्घटनाओं में 17 लोगों की मृत्यु हुई थी। राष्ट्रीय राजमार्ग पर मृतकों की संख्या स्थिर रही, राज्य मार्गों पर कमी दर्ज की गई, लेकिन मुख्य जिला मार्ग, अन्य जिला मार्ग एवं ग्रामीण मार्गों पर दुर्घटनाओं और मृतकों की संख्या में वृद्धि पाई गई। हालांकि, जनपद सीमा के भीतर कोई बड़ी दुर्घटना दर्ज नहीं हुई।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा-19 के तहत होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि को गंभीरता से लेते हुए पुलिस एवं परिवहन विभाग को मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा-19 के अंतर्गत चालन अनुज्ञप्ति (डीएल) निरस्तीकरण की कार्रवाई के निर्देश दिए।
धारा-19 के अंतर्गत आभ्यासिक अपराधी, शराब पीकर वाहन चलाने वाले, संज्ञेय अपराध में वाहन के उपयोग या जनता के लिए खतरा उत्पन्न करने वाले चालकों के लाइसेंस निरस्त किए जा सकते हैं।
निर्देश दिए गए कि जनपद में प्रत्येक ऐसी दुर्घटना जिसमें एक या अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हो, उसकी एफआईआर, चालक का लाइसेंस विवरण आदि पुलिस विभाग द्वारा लाइसेंसिंग प्राधिकारी/एआरटीओ (प्रशासन) को अनिवार्य रूप से भेजा जाए।
एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम कम करने के निर्देश
जनपद में वर्तमान में 102 श्रेणी की 21, 108 श्रेणी की 22, नेशनल मेडिकल मोबाइल यूनिट की 2 तथा एएलएस श्रेणी की 5 एम्बुलेंस उपलब्ध हैं। दुर्घटना मामलों में प्रायः 108 एम्बुलेंस का उपयोग किया जाता है, जबकि एएलएस एम्बुलेंस गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए प्रयुक्त होती है।
बैठक में बताया गया कि 108 एम्बुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम प्रदेश के औसत से अधिक है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को रिस्पॉन्स टाइम कम करने के निर्देश दिए।
‘पीएम राहत योजना’ के तहत मिलेगा नकद रहित उपचार
एआरटीओ ने अवगत कराया कि “सड़क दुर्घटना पीड़ितों का नकदी रहित उपचार स्कीम 2025” (05 मई 2025 से अधिसूचित) के अंतर्गत दुर्घटना की तिथि से अधिकतम सात दिनों तक प्रति पीड़ित 1.5 लाख रुपये तक के उपचार का प्रावधान है। इस योजना का नाम परिवर्तित कर अब “पीएम राहत योजना” कर दिया गया है।
जिलाधिकारी ने पुलिस एवं चिकित्सा विभाग को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षण की तैयारी करने के निर्देश दिए, ताकि दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित और समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
बैठक में रहे उपस्थित
बैठक में लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग एवं अन्य संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया और सड़क सुरक्षा को लेकर समन्वित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा के प्रति जनजागरूकता, कड़े प्रवर्तन और त्वरित चिकित्सा सहायता के माध्यम से ही दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सकती है।
