बागपत:(द दस्तक 24 न्यूज़) 09 सितंबर 2025 उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के ताजा फैसले ने प्रशासनिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आईएएस अस्मिता लाल, जिलाधिकारी बागपत ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (ACMO) डॉ. दीपा सिंह के खिलाफ गंभीर आरोपों के आधार पर निलंबन और कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की संस्तुति प्रमुख सचिव को भेजी थी। लेकिन हैरत की बात यह रही कि स्वास्थ्य विभाग ने उन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें और भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए रामपुर जिले का मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) बना दिया।
भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोप
डीएम बागपत द्वारा भेजे गए पत्रांक (मु.चि.अधि./कार्यवाही/2025-26/0150 दिनांक 06 सितंबर 2025) में कहा गया है कि—डॉ. दीपा सिंह, ACMO (लेवल-4, ई-एचआरएमएस कोड-126169), अपने संरक्षण में अल्ट्रासाउंड सेंटर्स में लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराधों को बढ़ावा दे रही थीं।
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठकों में उन्हें बार-बार निर्देशित किया गया था कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम का पालन सुनिश्चित कराएं और हर माह सभी अल्ट्रासाउंड सेंटर्स का निरीक्षण करें। लेकिन उनकी रिपोर्ट में हमेशा कहा गया कि सभी केंद्र नियमों के अनुरूप चल रहे हैं और किसी भी तरह की विसंगति नहीं है।
बाद में जब डीएम के आदेश पर एसडीएम और चिकित्सा अधिकारियों की संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया, तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए—04 केंद्र बंद मिले, 04 केंद्रों पर अधिकृत चिकित्सक अनुपस्थित पाए गए, 02 केंद्रों (राज नर्सिंग होम बलैनी और जीवन दीप नर्सिंग होम बागपत) पर फिक्स मशीन के स्थान पर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन मिली, इन तथ्यों के आधार पर सीएमओ बागपत ने भी अपनी आख्या में ACMO डॉ. दीपा सिंह को तत्काल निलंबित कर कठोर कार्यवाही की प्रबल संस्तुति की थी।
स्वास्थ्य विभाग का उल्टा फैसला
इसके बावजूद, उत्तर प्रदेश शासन (चिकित्सा अनुभाग-2) ने 08 सितंबर 2025 को आदेश जारी करते हुए डॉ. दीपा सिंह को ACMO बागपत से हटाकर रामपुर जिले का CMO नियुक्त कर दिया।
सरकारी आदेश के अनुसार—
यह तैनाती जनहित और प्रशासनिक आवश्यकताओं के दृष्टिगत की गई है। निर्देश दिया गया है कि डॉ. दीपा सिंह तत्काल कार्यमुक्त होकर रामपुर में कार्यभार ग्रहण करें और इसकी सूचना शासन को उपलब्ध कराएं।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निर्णयों की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
जहां जिलाधिकारी और सीएमओ, दोनों ने डॉ. दीपा सिंह के खिलाफ निलंबन और अनुशासनात्मक कार्यवाही की संस्तुति की, वहीं विभाग ने उसी अधिकारी को और बड़ी जिम्मेदारी देकर सम्मानित कर दिया।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा
यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई का नहीं, बल्कि नीति और जवाबदेही का भी बन गया है।
बागपत की जिलाधिकारी द्वारा संस्तुत गंभीर आरोपों की अनदेखी कर दिया जाना कई स्तरों पर गंभीर लापरवाही के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर तब, जब मामला कन्या भ्रूण हत्या जैसे संवेदनशील अपराध से जुड़ा हो।
अब देखना यह होगा कि क्या स्वास्थ्य विभाग अपने फैसले पर पुनर्विचार करता है या यह मामला केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा।
