प्रख्यात कवि, गीतकार और उपन्यासकार वैरामुथु को भारतीय साहित्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह घोषणा 14 मार्च को की गई। ज्ञानपीठ पुरस्कार देश का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है। वैरामुथु पिछले 20 साल में यह पुरस्कार पाने वाले तीसरे तमिल लेखक हैं। यह पुरस्कार कविता, उपन्यास और फिल्म गीतों में उनकी उपलब्धियों को मान्यता देता है। वैरामुथु ने 1972 में कविता संग्रह ‘वैगराई मेघंगल’ के प्रकाशन के साथ अपने साहित्यिक सफर की शुरुआत की। तब से उन्होंने कविता संग्रहों और कई उपन्यासों सहित 40 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। तमिल साहित्य में उनकी लेखन शैली को उसकी गहराई और सांस्कृतिक प्रभाव के लिए सराहा जाता है। उनका साहित्यिक कार्य पांच दशकों से अधिक समय तक फैला हुआ है। उनकी कई कविताएं तमिल समाज में हुए सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों को दर्शाती हैं।
अपनी साहित्यिक उपलब्धियों के अलावा वैरामुथु ने तमिल फिल्मों के लगभग 7,500 गीत लिखकर भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी है। प्रमुख संगीतकारों और फिल्म निर्माताओं के साथ सहयोग करते हुए वैरामुथु के गीत तमिल फिल्म संगीत जगत का एक अभिन्न अंग बन गए हैं।
