फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 10 जनवरी 2026 उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद में आयोजित श्रीरामनगरिया मेला इस वर्ष केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रहकर अध्यात्म, दर्शन और सनातन विमर्श का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा। मेला परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरियाणा निवासी अध्यात्म चिंतक संजय पाराशर ने अपने आध्यात्मिक अनुभवों, जीवन यात्रा और सनातन धर्म से जुड़े विचारों को मीडिया एवं आमजन के साथ साझा किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय पाराशर ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी। अंग्रेजी विषय का अध्यापन करते हुए उनके मन में जीवन, समाज और आत्मा से जुड़े अनेक प्रश्न उठने लगे। यही प्रश्न धीरे-धीरे उन्हें आत्ममंथन और अध्यात्म की ओर ले गए। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 15 वर्षों से वे सनातन धर्म, भारतीय दर्शन और विभिन्न आध्यात्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन कर रहे हैं। उनके अनुसार सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति या कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, नैतिकता और आत्मज्ञान के मार्ग पर चलाने की शाश्वत शैली है।
रामनगरिया मेला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संजय पाराशर ने फर्रुखाबाद को “अपर काशी” की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि यह जनपद प्राचीन काल से आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रहा है। साथ ही उन्होंने हरियाणा के कुरुक्षेत्र तथा उत्तर प्रदेश के अयोध्या, मथुरा और वाराणसी के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी स्थल सनातन परंपरा के मजबूत स्तंभ हैं। गीता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके उपदेश कर्म, धर्म और जीवन संतुलन का ऐसा दर्शन प्रस्तुत करते हैं, जो आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय पाराशर ने अपने आध्यात्मिक अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि जब-जब समाज और विश्व में नैतिक मूल्यों का पतन होता है, तब-तब धर्म की पुनर्स्थापना के प्रयास होते हैं। इसी विचारधारा के तहत उन्होंने 5 दिसंबर 2004 को एक आध्यात्मिक अभियान की शुरुआत की। उनका मानना है कि आज का मानव समाज आध्यात्मिकता से दूर होता जा रहा है, जिसके कारण भ्रष्टाचार, हिंसा, स्वार्थ और अधर्म बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में आत्मचिंतन और परमपिता परमात्मा की सही पहचान ही मानवता को सही दिशा दे सकती है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उनका अभियान किसी विशेष पूजा-पद्धति या धार्मिक आडंबर तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को आत्मा और परमात्मा के सत्य से परिचित कराना है। अपने आध्यात्मिक सफर के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 12 वर्षों की साधना और अध्ययन के बाद उनका संपर्क ब्रह्माकुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय से हुआ, जहां रहकर उन्होंने ध्यान, आत्मज्ञान और आध्यात्मिक शिक्षा का गहन अनुभव प्राप्त किया। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने “आध्यात्मिक ब्रह्मकुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय” की परिकल्पना को आगे बढ़ाया।
अंत में संजय पाराशर ने स्पष्ट किया कि उनका यह अभियान किसी एक धर्म, जाति या वर्ग के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक बन सकता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मेला में आए लोग और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने उनके विचारों में गहरी रुचि दिखाई।
