लखीमपुर खीरी : भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर डीएम को सैनिक कल्याण अधिकारी धनंजय प्रताप सिंह ने लगाया प्रतीक ध्वज

लखीमपुर खीरी : ( द दस्तक 24 न्यूज ) 07 दिसंबर 2025 दिन रविवार को जिला मुख्यालय देशभक्ति की भावनाओं से सराबोर रहा। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी धनंजय प्रताप सिंह ने डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल को सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर झंडा दिवस का प्रतीक ध्वज लगाया साथ ही प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने सैनिक स्मारिका का विमोचन भी किया। डीएम ने शहीदों के परिजनों और वीर सेनानियों के सम्मान में सहयोग राशि भी प्रदान की। 1965 के भारत पाक युद्ध के हीरक जयंती पर निदेशालय उत्तर प्रदेश सैनिक कल्याण द्वारा जारी स्मृति चिन्ह भी उन्हें सौंपा गया। परमवीर चक्र से सम्मानित उतर प्रदेश के सपूत अब्दुल हमीद की तस्वीर इस स्मृति चिन्ह में प्रमुख रूप से अंकित है।
जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर वीर जवानों और उनके परिजनों को हृदय से नमन करते हुए कहा भारत की रक्षा पंक्तियों पर खड़े हर जवान में जो अदम्य साहस चमकता है, वही साहस इस देश की 140 करोड़ धड़कनों में विश्वास और सुरक्षा का संचार करता है। सैनिक केवल सीमा की रक्षा नहीं करते, वे हमारे सपनों, हमारे भविष्य और हमारे अस्तित्व की रक्षा करते हैं। इसी अनमोल सेवा और सर्वोच्च बलिदान को नमन करने का अवसर हर देशवासी को 7 दिसंबर को मिलता है, जब देश ‘सशस्त्र सेना झंडा दिवस’ मनाता है। एक ऐसा दिन जो कर्तव्य, त्याग और राष्ट्रीय समर्पण की सशक्त याद दिलाता है। 1949 से इस दिवस को मनाने का उद्देश्य उन शहीदों और वर्दीधारी सैनिकों का सम्मान करना है जिन्होंने दुश्मनों से डटकर मुकाबला करते हुए राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। सैनिक किसी भी देश की सबसे अहम पूंजी होते हैं। वे राष्ट्र की ढाल हैं जो नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने जीवन की सबसे बड़ी कीमत चुकाते हैं। देश सदैव इन वीर सपूतों का ऋणी रहेगा जो मातृभूमि की सेवा को अंतिम धर्म मानते हैं। यह झंडा दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि वीरता केवल मोर्चे पर नहीं होती, उसके पीछे कई अदृश्य त्याग भी होते हैं। सैनिक के साथ उसका परिवार भी समान रूप से उस बलिदान का हिस्सा बनता है। उनके सपने, उनकी चिंताएं और उनकी उम्मीदें अक्सर देश की खातिर पीछे रह जाती हैं। इसलिए सैनिकों और शहीदों के परिवारों की सराहना और सहयोग करना नागरिकों का साझा दायित्व बनता है।