दिग्गज कलाकार गोवर्धन असरानी ने 84 साल की आयु में अंतिम सांस ली। उनके निधन से फिल्म और कला जगत मायूस है। तमाम साथी कलाकारों ने अपने तरीके से असरानी को याद कर श्रद्धांजलि दी। उनके मैनेजर बाबू भाई ने एक ऐसी भावुक और प्रेरक बात बताई है, जिसे सुन कर केवल इतना कहा जा सकता है, आसान नहीं है असरानी होना… जानिए खास बात
अल्लामा इकबाल की ये पंक्तियां असरानी के जीवन से चरितार्थ होती हैं। भारतीय फिल्म और रंगमंच के दिग्गज कलाकार गोवर्धन असरानी की देह बीत गई। 84 साल की आयु में अंतिम सांस लेने वाला ये दिग्गज कलाकार हर आयु वर्ग में लोकप्रिय और मशहूर रहा। आज भी दशकों पुरानी फिल्म शोले का आइकॉनिक डायलॉग ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’ लाखों-करोड़ों अधरों पर मुस्कान बिखेर देता है। अब जबकि असरानी हमारे बीच नहीं हैं, उनके मैनेजर बाबू भाई थीबा ने एक ऐसी बात साझा की है, जो उनके चाहने वालों को भावुक करने के साथ-साथ प्रेरित भी करती है।
दरअसल, शोहरत की बुलंदियों और कामयाबी की तमाम रेखाओं को छूकर गुजरने के बाद भी आदमी कितनी सादगी से अपना जीवन गुजार सकता है, असरानी इसकी मिसाल हैं। मैनेजर बाबू भाई थीबा ने बताया कि असरानी कहा करते थे, अपनी अंतिम विदाई में वे एक आम आदमी की तरह जाना चाहते हैं। एक अन्य दिग्गज कलाकार जो उम्र में भले ही असरानी से 15 साल छोटे हैं, लेकिन वे भी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं, उन्होंने भी असरानी की इस बात को प्रेरणा माना है। असरानी के जीवन से जुड़ा ये प्रसंग हम सबको जानना चाहिए, जिससे आने वाले समय में ये बात करोड़ों लोगों के जीवन में प्रकाश पुंज की तरह चमकता रहे।
असरानी के साथ अपने अनुभवों को याद कर मैनेजर बाबू भाई ने बताया कि वे दो दशकों से अभी अधिक समय उनके साथ रहे। बाबू भाई ने कहा, ‘इन 20 वर्षों में मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने मुझे एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित किया। असरानी परिवार की ओर से, मैं एक्स के जरिए प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से व्यक्त की गई भावनाओं के लिए उनका भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। मैं उन सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होंने उन्हें याद किया। असरानी साहब हमेशा यादों में रहेंगे। दर्शकों ने उन्हें जिस तरह सराहा, वह हमेशा यादगार रहेगा।’
