फर्रुखाबाद: बुद्ध की करुणा: जिसने मानवता को दिशा दी, वही भारत आज ज्ञान के दीप तले अंधकार में।

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 10 अक्टूबर 2025 जब से मानव ने तथागत गौतम बुद्ध को जाना, तब से विश्व ने करुणा, मैत्री, और समानता की नई परिभाषा जानी। बुद्ध के बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय के सिद्धांत ने न केवल भारत बल्कि संपूर्ण विश्व को शांति और समता का संदेश दिया। यह विडंबना ही है कि जिस भारतभूमि पर ज्ञान का यह दीपक पहली बार प्रज्वलित हुआ, वहीं आज भी अंधकार—अज्ञान और भेदभाव का—गहराता जा रहा है।

लेखक महेंद्र सिंह शाक्य (चीफ एडवाइजर, भारतीय जीवन बीमा निगम, फर्रुखाबाद) ने अपने प्रेरक विचारों में कहा कि बुद्ध का धर्म ही वह माध्यम है जो मनुष्य को अनुशासन, विवेक, और मानवता की राह दिखाता है। जो बुद्ध को समझता है, वह संसार को समझता है, क्योंकि बुद्ध का प्रत्येक विचार पारदर्शी है—सूक्ष्म से लेकर विराट तक सबमें उनका सत्य झलकता है।

बुद्ध: ज्ञान, करुणा और सत्य के प्रतीक

बुद्ध का दर्शन कोई कल्पना नहीं, बल्कि जीवन जीने की वैज्ञानिक कला है। उन्होंने बताया कि इंसान की जाति, उसका जन्म नहीं बल्कि उसके कर्म तय करते हैं। उनके उपदेशों में प्रज्ञा (ज्ञान), शील (संयम), करुणा (दया), मैत्री (सद्भाव) और अहिंसा (शांति) जैसे तत्व हैं, जो समाज को अनुशासित और संतुलित बनाए रखते हैं।

लेख में वर्णित प्रसंग के अनुसार, एक बार जब भगवान बुद्ध जेतवन विहार में ठहरे थे, तो मध्यरात्रि में देवताओं ने उनके समक्ष प्रकट होकर पुष्पवर्षा की और कहा — “हे तथागत! आपने जो धर्म लोककल्याण के लिए दिया है, वह अलौकिक है। आपने मनुष्य को सरल मध्यम मार्ग देकर धन्य कर दिया।”

इस पर बुद्ध ने उत्तर दिया — “जो हिंसक, दुराचारी, झूठे और अत्याचारी हैं, उन्हें अपने कर्मों का फल अवश्य मिलेगा। मेरा धर्म उन्हें प्रकाश की ओर ले जाएगा, जो अंधकार में भटके हुए हैं।”

धर्म जो अंधकार मिटाता है

बुद्ध का धर्म केवल पूजा या अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक अनुभव और अभ्यास का विज्ञान है। यह धर्म सिखाता है कि —कोई मनुष्य जन्म से ब्राह्मण या शूद्र नहीं होता। कर्म ही मनुष्य की पहचान है। जाति, छुआछूत, अंधविश्वास और हिंसा जैसे सामाजिक रोगों से मुक्ति ही सच्चा ज्ञान है।

लेखक महेंद्र सिंह शाक्य लिखते हैं —“बुद्ध का धर्म उसी प्रकार का चमत्कार है, जैसे अंधेरे कमरे में दीपक जल जाए। एक बार यह प्रकाश तुम्हारे भीतर जल गया, तो तुम्हारी सारी शंकाएं, अंधविश्वास और भय समाप्त हो जाएंगे।”

बुद्ध का धर्म: वैश्विक प्रेरणा

आज दुनिया के अधिकांश देश तथागत बुद्ध को जानते हैं, मानते हैं और उनके उपदेशों को जीवन में उतार रहे हैं। अमेरिका से लेकर जापान तक, अफ्रीका से लेकर यूरोप तक, हर जगह बुद्ध के सम्यक विचार मानवता की दिशा तय कर रहे हैं। पर विडंबना यह है कि भारत, जो बुद्ध की जन्मभूमि है, वहीं अब भी जातिगत, सामाजिक और मानसिक बंधनों से जूझ रहा है।

निष्कर्ष: बुद्ध को समझना ही सच्ची विद्वता

महेंद्र सिंह शाक्य का लेख यह संदेश देता है कि बुद्ध को केवल पढ़ने या पूजने से नहीं, बल्कि उनके विचारों को जीने से समझा जा सकता है।

जब हम बुद्ध के “मध्यम मार्ग” को अपनाते हैं, तब ही हम अपने भीतर का अंधकार मिटाकर सच्चे सुख की प्राप्ति करते हैं।

वास्तव में, यही मानव जीवन का वास्तविक बोध है — “तुम्हारी हार ही तुम्हारी जीत होगी, जब तुम अहंकार छोड़ बुद्ध के सम्यक मार्ग को स्वीकार करोगे।”

लेखक: महेंद्र सिंह शाक्य

स्थान: बायपास रोड, बौद्ध नगर, नगला खैरबंद, फर्रुखाबाद

पद: चीफ एडवाइजर, भारतीय जीवन बीमा निगम, फर्रुखाबाद