फर्रुखाबाद में किसानों की महापंचायत: मांगों का विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज) 22 सितम्बर 2025 भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की अगुवाई में जनपद में किसानों की मांगों को लेकर एक विशाल किसान मजदूर महापंचायत का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों किसानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए सरकार और प्रशासन से अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की। महापंचायत के मंच से किसानों ने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा और इसके बाद जिलाधिकारी को 8 प्रमुख बिंदुओं वाला विस्तृत मांग पत्र सौंपा।

मुख्य मांगें और मुद्दे

1. लिंक एक्सप्रेसवे का विरोध एवं सर्किल रेट में समानता की मांग

किसानों ने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे निर्माण में जमीन अधिग्रहण के दौरान भारी असमानताएं की जा रही हैं। एक ही क्षेत्र में उपजाऊ जमीन का सर्किल रेट अलग-अलग तय किया गया है। जैसे हाथीपुर का रेट ₹1.30 करोड़ प्रति हेक्टेयर है, वहीं पास के आदिउली का रेट मात्र ₹21 लाख प्रति हेक्टेयर है। इसी प्रकार कई गांवों में यह असमानता पाई गई है। किसानों ने मांग की कि सभी गांवों के लिए सर्किल रेट एक समान और उचित बढ़ाए जाएं।

इसके अलावा एक्सप्रेसवे पर बनाए जा रहे कटों के लिए अतिरिक्त जमीन लेने का विरोध करते हुए किसानों ने कहा कि चढ़ने-उतरने की सड़कें आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की तरह 120 मीटर चौड़ाई में ही बनाई जाएं। साथ ही वर्तमान सर्वे को त्रुटिपूर्ण बताते हुए किसानों ने आबादी से दूर नया सर्वे करने की मांग रखी।

2. गंगा और रामगंगा के किनारे बांध निर्माण की मांग

कायमगंज और कमालगंज ब्लॉक सहित कई क्षेत्रों के किसान बाढ़ से लगातार प्रभावित होते हैं। किसानों ने धीमर नगला से ढ़ाईघाट और श्रृंगीरामपुर तक गंगा नदी के दोनों किनारों पर बांध बनाने की मांग की। वहीं, अमृतपुर तहसील की ग्रामसभा गुडेरा से लेकर भावन तक रामगंगा किनारे भी बांध निर्माण जरूरी बताया।

3. चकबंदी निरस्त करने की मांग

मोहम्मदाबाद ब्लॉक की ग्रामसभा बराकेशव में किसानों ने वोटिंग के आधार पर चकबंदी निरस्त करने और 6(1) जारी करने की मांग रखी।

4. बाढ़ प्रभावित किसानों को राहत

महापंचायत में किसानों ने कहा कि बाढ़ की वजह से उनकी जमीनें जलमग्न हो गई हैं। अगले एक महीने तक बुवाई संभव नहीं है। इसलिए बाढ़ प्रभावित किसानों का लोन और बिजली बिल माफ किया जाए।

5. खाद की किल्लत दूर करने की मांग

किसानों ने बताया कि जनपद में खाद की भारी कमी है। किसान लंबी लाइनों में लगकर भी खाद नहीं पा रहे हैं। सरकार से मांग की गई कि खाद की कमी तत्काल दूर कर हर किसान को समय से खाद उपलब्ध कराई जाए।

6. महायोजना 2031 में सुधार की मांग

किसानों ने फर्रुखाबाद की महायोजना 2031 को त्रुटिपूर्ण बताते हुए संशोधन की मांग रखी। उदाहरण के तौर पर सेंट्रल जेल चौराहे से बकुतगंज तक 120 मीटर रोड और 60 मीटर हरित पट्टी प्रस्तावित है, जो अव्यवहारिक है। इसी प्रकार कादरी गेट से पंचालघाट तक 45 मीटर और द्विलावल चौराहे से जसमई चौराहे तक 52 मीटर रोड प्रस्तावित है। किसानों का कहना है कि इन प्रस्तावों में सुधार अत्यंत आवश्यक है।

7. आलू किसानों की समस्या

जनपद में कोल्ड स्टोरेज में भंडारित आलू की कीमतें गिर गई हैं। उचित भाव न मिलने से किसान चिंतित और परेशान हैं। किसानों ने सरकार से आलू निर्यात की तत्काल अनुमति देने की मांग की, ताकि किसानों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने की नौबत न आए।

8. छुट्टा गौवंश से निजात की मांग

किसानों ने कहा कि बाढ़ और अन्य संकटों के साथ-साथ छुट्टा गौवंश उनकी फसलें चौपट कर रहे हैं। किसान रात-रात भर जागकर फसलों की रखवाली करते हैं, फिर भी नुकसान झेलना पड़ता है। कई बार गौवंश किसानों पर हमला भी कर देते हैं। किसानों ने मांग की कि सभी गौवंशों को गोशालाओं में भेजा जाए।

किसान नेताओं ने रखी अपनी बात

महापंचायत में मंडल अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह, राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन, प्रदेश उपाध्यक्ष सलीम सिद्दीकी, प्रदेश अध्यक्ष राजपाल शर्मा, प्रदेश प्रमुख महासचिव बृजेंद्र सिंह यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद सिंह शाक्य, जिला अध्यक्ष अजय कटिहार सहित दर्जनों पदाधिकारी मौजूद रहे।

सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि मांगों का निस्तारण शीघ्र नहीं किया गया तो किसान आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

निष्कर्ष

किसानों का कहना है कि उनकी समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं। चाहे बात बाढ़ से सुरक्षा की हो, खाद की उपलब्धता की हो या छुट्टा पशुओं से राहत की—प्रत्येक समस्या सीधे किसान की जीविका से जुड़ी है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार किसानों की इन जायज मांगों पर कितनी शीघ्र कार्रवाई करती है।