फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 13 सितम्बर 2025 जनपद के लोहिया अस्पताल में पहली बार एक बड़ी और दुर्लभ सर्जरी को अंजाम दिया गया। 17 वर्षीय किशोरी, जिसकी गर्दन के दाहिने हिस्से में विशाल गांठ (सिस्टिक हाइग्रोमा/लिम्फैंगियोमा) तेजी से बढ़ रही थी, जिसका सफल ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई गई। यह सर्जरी मेजर डॉ. रोहित तिवारी की देखरेख में की गई।
दिल्ली तक कराए गए इलाज के बाद भी नहीं मिली राहत
किशोरी की गर्दन में गांठ पिछले कुछ समय से तेजी से बढ़ रही थी। स्थानीय चिकित्सकों ने कई बार अल्ट्रासाउंड और सुई के जरिए तरल निकालने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति और बिगड़ गई। इसके बाद उसे कानपुर, सैफई मेडिकल कॉलेज और यहां तक कि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल तक रेफर किया गया।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। पिता मनरेगा में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, इसलिए बड़े निजी अस्पताल में महंगे इलाज की संभावना लगभग खत्म हो गई थी।
लोहिया अस्पताल में हुई सफल सर्जरी
ऐसे हालात में मेजर डॉ. रोहित तिवारी ने निर्णय लिया कि ऑपरेशन यहीं लोहिया अस्पताल, फर्रुखाबाद में किया जाएगा। जनरल एनेस्थीसिया के तहत अत्यंत सावधानीपूर्वक ऑपरेशन किया गया और किशोरी की गर्दन से विशाल गांठ पूरी तरह हटा दी गई। विशेष बात यह रही कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी नस या महत्वपूर्ण अंग को नुकसान नहीं हुआ।
सर्जरी के बाद लौटा आत्मविश्वास
सर्जरी के सफल होने के बाद किशोरी अब स्वस्थ हो रही है। बड़ी गांठ निकल जाने से उसकी शारीरिक बनावट सामान्य हो गई है, मानसिक तनाव कम हुआ है और उसका आत्मविश्वास लौट आया है। परिवार ने राहत की सांस लेते हुए लोहिया अस्पताल और डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया।
डॉक्टर ने क्या कहा?
मेजर डॉ. रोहित तिवारी ने बताया कि यह मामला सिस्टिक हाइग्रोमा (लिम्फैंगियोमा) का था, जो लसीका तंत्र से जुड़ी एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी है। इसमें गर्दन या बगल में तरल से भरी बड़ी गांठ बन जाती है, जो धीरे-धीरे आकार में बढ़ती रहती है। इसका सबसे उपयुक्त और स्थायी इलाज सर्जरी ही है।
उन्होंने कहा, “यह केस इस बात का प्रमाण है कि यदि समय पर जांच और उचित इलाज मिल जाए तो गंभीर और जटिल बीमारियों पर भी विजय पाई जा सकती है। फर्रुखाबाद में भी बड़े स्तर की सर्जरी सफलतापूर्वक संभव है।”
क्या है सिस्टिक हाइग्रोमा?
सिस्टिक हाइग्रोमा या लिम्फैंगियोमा लसीका तंत्र की एक जन्मजात विकृति है। इसमें शरीर में तरल से भरे थैले (सिस्ट) बन जाते हैं। यह स्थिति ज्यादातर गर्दन और बगल के हिस्सों में पाई जाती है और धीरे-धीरे आकार में बढ़ती जाती है। यदि समय रहते इलाज न हो तो यह शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर रोगी के लिए गंभीर समस्या बन सकती है।
फर्रुखाबाद के लिए यह ऑपरेशन एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि जनपद में भी आधुनिक और जटिल सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है और जरूरत पड़ने पर मरीजों को बड़े शहरों में रेफर किए बिना ही बेहतर इलाज मिल सकता है।
