फर्रुखाबाद से खिसका ढाईघाट का मेला, अब होगा शाहजहांपुर के जिम्मे।

फर्रूखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 06 सितंबर 2025 जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर माघ मेला रामनगरिया ढाईघाट अब फर्रुखाबाद प्रशासन के हाथ से निकल गया है। शासन ने इस मेले का संपूर्ण दायित्व जिला पंचायत शाहजहांपुर को सौंपने का निर्णय लिया है। शासन के आदेश के बाद न केवल मेले की जिम्मेदारी बल्कि उससे जुड़ी प्रशासनिक एवं पुलिस व्यवस्था भी शाहजहांपुर प्रशासन के अधीन होगी।

शासन का आदेश

पंचायती राज अनुभाग-2, लखनऊ से जारी आदेश (पत्रांक 2811/आ०लि०-जि०अधि०-शाह०/2025 दिनांक 15.08.2025) का संदर्भ लेते हुए शासन के उप सचिव किरेन्द्र पाल सिंह ने 05 सितंबर 2025 को जिलाधिकारी शाहजहांपुर को निर्देशित किया कि माघ मेला रामनगरिया ढाईघाट का आयोजन अब जिला पंचायत शाहजहांपुर ही कराएगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शासन स्तर पर इस प्रकरण पर सम्यक विचार के बाद यह निर्णय लिया गया है।

फर्रुखाबादियों में आक्रोश

इस फैसले से फर्रुखाबाद के लोग आहत हैं। वर्षों से फर्रुखाबाद की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक आस्था से जुड़ा यह मेला अब दूसरे जिले के अधीन चला गया है।

लोगों का कहना है कि –पहले ही एक्सप्रेस-वे की रूटिंग से फर्रुखाबाद की अनदेखी हुई। अब मेले जैसी परंपरा भी छिनकर शाहजहांपुर को सौंप दी गई। यह फर्रुखाबादियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।

कई स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहा – “फर्रुखाबादियों, अब गन्ना चूसो… शासन ने मेला भी खिसका दिया। बेहतर तो यह है कि फर्रुखाबाद को ही शाहजहांपुर में मिला दिया जाए।”

जनप्रतिनिधियों पर सवाल

लोगों का गुस्सा जिले के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर भी फूटा है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे बैठे हैं, जबकि जिले की पहचान एक-एक कर छीनी जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्थानीय सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि फर्रुखाबाद के हितों की रक्षा कर पाएंगे या फिर यह निर्णय अंतिम ही साबित होगा।

आगे की कार्यवाही

आदेश की प्रतिलिपि शाहजहांपुर और फर्रुखाबाद दोनों जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष एवं अपर मुख्य अधिकारियों को भेज दी गई है। अब प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था की कमान पूरी तरह शाहजहांपुर के हाथों में रहेगी।

 निष्कर्ष

ढाईघाट का माघ मेला न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा आयोजन है, बल्कि फर्रुखाबाद की ऐतिहासिक पहचान भी रहा है। शासन के इस आदेश ने जिलेवासियों को गहरे असंतोष में डाल दिया है। अब देखना यह है कि फर्रुखाबाद के जनप्रतिनिधि इस पर क्या कदम उठाते हैं या फिर फर्रुखाबाद की धरोहर सचमुच शाहजहांपुर के खाते में दर्ज हो जाएगी।