कासगंज: जनपद में पर्याप्त उर्वरक की उपलब्धता है, किसान भाई उर्वरकों की होर्डिंग ना करें

कासगंजः जनपद कासगंज में खरीफ सीजन हेतु दिनाक 01-04-2025 से दिनाँक 28-08-2025 तक कुल 47009.945 मै०टन यूरिया, 9299.175 मै०टन डी०ए०पी०, 3812.010 मै०टन एन०पी० के०, 1090.300 मै०टन एम०ओ०पी० एवं 598.550 मै०टन एस०एस०पी० उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करायी गयी है, जिसमें से अब तक 41062.515 मै०टन यूरिया, 5625.050 मै०टन डी०ए०पी०, 1536.490 मै०टन एन०पी० के०, 830.00 मै०टन एम०ओ०पी० एवं 104.00 मै०टन एस०एस०पी० का वितरण हुआ है तथा आज की तिथि में 5947.430 मै०टन यूरिया, 3674.125 मै०टन डी०ए०पी०, 2275.520 मै०टन एन0पी0के0, 260.300 मै० टन एम०ओ०पी० एवं 494.550 मै०टन एस०एस०पी० उपलब्ध है। वर्तमान में जनपद कासगंज में सहकारिता क्षेत्र में 5164.42 मै०टन यूरिया व 1962.85 मै०टन डी०ए०पी० तथा निजी क्षेत्र में 783.010 मै०टन यूरिया व 1711.275 मै०टन डी०ए०पी० का स्टॉक उपलब्ध है।
जनपद में खरीफ में मुख्य रूप से 45573 हे0 धान, 44800 हे0 मक्का एवं 47850 हे0 क्षेत्रफल में बाजरा की बुवाई की गयी है और समस्त खरीफ फसलों में आवश्यकतानुसार यूरिया आदि उर्वरकों का प्रयोग किया जा चुका है। यह भी उल्लेखनीय है कि जनपद में विगत खरीफ 2024 की तुलना में खरीफ 2025 में अधिक यूरिया उर्वरक का प्रयोग किया गया है। जनपद में मुख्य रूप से बासमती धान की खेती की जाती है, जिसमें अधिक यूरिया उर्वरक के प्रयोग करने से फफूँदजनित रोग-बकानी / झण्डा रोग सहित अन्य कीट-रोग का प्रकोप बहुतायत में होता है, क्योकि अधिक यूरिया के उपयोग से पौधों में पानी की मात्रा अधिक होने से पौधे मुलायम हो जाते हैं और पौधों का रंग गहरा हरा हो जाने से कीट फसल की तरफ तेजी से आकर्षित होते हैं। इससे ना केवल हमारी कृषि लागत बढ़ती है, बल्कि कीट-रोग प्रबन्धन में अधिक पैसा व्यय होता है। साथ ही अधिक यूरिया एवं अन्य रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशी रशायनों के प्रयोग करने से हमारी कृषि योग्य भूमि प्रदूषित होने के साथ-साथ उत्पादन देने की क्षमता खोती जा रही है और इससे हमारा भूजल एवं पर्यावरण ही प्रदूषित हो रहा है।
अतः किसान भाइयों से अपील की जाती है कि उगायी जाने वाली फसलों में वैज्ञानिक संस्तुति के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें और नैनो यूरिया एवं नैनो डी०ए०पी० के प्रयोग को बढ़ावा दें, क्योंकि इसके प्रयोग से पौधों की संतुलित वृद्धि एवं विकास होता है। आगामी रवी सीजन हेतु भी जनपद की मॉग एवं आवश्यकता के दृष्टिगत नत्रजन, फास्फेटिक एवं पोटैशिक उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है और उर्वरकों की लगातार आवक एवं आपूर्ति बनी हुई है। इसलिए किसान भाई अपनी तात्कालिक आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का क्रय करें। यह भी अवगत कराना है कि जनपद में उर्वरकों की निर्धारित दर से अधिक दर पर बिक्री, प्रचलित उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग, उर्वरकों का अवैध भण्डारण, होर्डिंग, अनियमित बिक्री, एवं कालाबाजारी आदि करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जा रही है, अभी तक दोषी पाये गये उर्वरक विक्रेताओं/व्यक्तियों के विरूद्ध 07 प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी गयी हैं और 06 उर्वरक प्रतिष्ठान/गोदामों को सील करते हुए 19 उर्वरक प्राधिकार पत्र निरस्त, 70 उर्वरक प्राधिकार पत्र निलम्बित तथा 62 उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किये गये हैं। साथ ही कृषि, सहकारिता एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा भी जनपद में उर्वरकों के वितरण का औचक निरीक्षण किया जा रहा है तथा लगातार इसकी निगरानी एवं अनुश्रवण किया जा रहा है एवं जनपद में कृषकों की आवश्यकतानुसार उर्वरक की निरन्तर आपूर्ति करायी जा रही है।