फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 21 अगस्त 2025 उत्तर प्रदेश के जनपद के कायमगंज ब्लॉक के कई गांव इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि गांवों में सामान्य जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
★घरों में पानी, चूल्हा तक ठंडा
गांवों में इतना पानी भर चुका है कि लोग अपने घरों में खाना तक नहीं बना पा रहे हैं। तेज़ धार की वजह से कई पेड़ टूटकर गिर गए, जबकि कई पेड़ बाढ़ के पानी में बह गए। जिन नालों से लोग पीने का पानी भरते थे, वे भी अब पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। झोपड़ियों और कच्चे मकानों के नीचे तक पानी पहुंच चुका है, जिससे ग्रामीणों के पास कहीं निकलने की जगह नहीं बची।
★शौचालय और ट्यूबवेल भी जलमग्न
स्थिति और भयावह तब हो गई जब कई शौचालयों के अंदर तक पानी भर गया। ग्रामीणों का कहना है कि शौच के लिए अब उन्हें बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। पानी निकालने वाले साधन, जैसे ट्रॉलियां और ट्यूबवेल, पूरी तरह डूब चुके हैं।
★मवेशियों के लिए भी संकट
गांवों में मवेशियों को रखने के लिए भी कोई सुरक्षित जगह नहीं बची। लोग और जानवर दोनों मिलकर सड़कों पर शरण लेने को मजबूर हैं। थोड़ी-बहुत ऊँची जगह केवल सड़कें ही बची हैं, जिन पर ग्रामीण और उनके मवेशी किसी तरह दिन-रात गुज़ार रहे हैं।
★कमर तक भरा पानी
कई जगहों पर पानी कमर तक भर गया है। कुछ लोग ट्रैक्टर पर मोटर लगाकर पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं, तो कहीं लोग पानी में ही खड़े होकर जूझते नज़र आते हैं। गांव की सड़कें पूरी तरह से डूब चुकी हैं, जिससे आना-जाना बेहद मुश्किल हो गया है।
★किसानों की मेहनत डूब गई
किसानों के खेतों में खड़ी फसलें लगातार पानी में डूबी रहने के कारण सड़ चुकी हैं। धान, गन्ना और सब्ज़ियों जैसी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। ग्रामीणों ने बताया कि “पैरों को पानी में डाले बिना कहीं जाना संभव नहीं है। खेतों में पानी है, घरों में पानी है, सड़कों पर पानी है… चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ पानी ही पानी है।”
★प्रशासन की चुनौती
ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक राहत और बचाव कार्य धीमी गति से चल रहा है। कई गांवों में नाव या मदद का इंतज़ाम नहीं पहुंच पाया है। पीने का साफ पानी, भोजन और दवाइयों की किल्लत सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है।
★निष्कर्ष
फर्रुखाबाद के गांवों में बाढ़ की वजह से हालात बेहद गंभीर हैं। ग्रामीण जलभराव, खाद्यान्न संकट और बीमारियों की आशंका के बीच खुले आसमान के नीचे दिन-रात काटने को मजबूर हैं। किसानों की मेहनत डूब चुकी है और आमजन जीवन ठप पड़ गया है। ऐसे में ज़रूरत है कि प्रशासन त्वरित राहत कार्य शुरू करे और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाकर उन्हें भोजन, पानी और दवाइयों की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराए।
