उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ द्वारा जनपद कासगंज स्थित नवोदय विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया।

छात्रों ने बताया कि विद्यालय में परोसा जाने वाला भोजन अत्यंत निम्न गुणवत्ता का होता है। सब्ज़ियों में आवश्यक मसालों का अभाव रहता है, सरसों के तेल के स्थान पर परिष्कृत (refined) तेल का प्रयोग किया जाता है तथा छौंक न होने से स्वादहीनता व्याप्त रहती है। मसालों को कच्चे रूप में पानी में घोलकर सब्ज़ी में मिलाया जाता है, जिससे न केवल स्वाद में कमी आती है, अपितु पोषण स्तर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

तकनीकी शिक्षा की दिशा में भी विद्यालय की उदासीनता सामने आई, जहां छात्रों को न तो कंप्यूटर का उपयोग करने की अनुमति है और न ही स्मार्ट बोर्ड्स के माध्यम से कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं। राज्य सरकार द्वारा विद्यार्थियों को प्रदत्त टैबलेट्स को भी विद्यालय प्रशासन ने वापस ले लिया है, जिससे डिजिटल शिक्षा की दिशा में विद्यार्थियों को कोई लाभ प्राप्त नहीं हो रहा।

इसके अतिरिक्त, छात्राओं ने यह भी अवगत कराया कि विद्यालय में उपलब्ध सैनिटरी पैड्स की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की है, जो उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर विषय है। विद्यालय परिसर में एक कैंटीन का निर्माण किया गया है जहाँ चाउमिन जैसे जंक फूड्स परोसे जाते हैं, जो बालिकाओं के स्वास्थ्य के प्रति स्कूल प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं की बात करें तो विद्युत आपूर्ति नियमित नहीं है, जलसंकट की स्थिति विकराल है — जलाशयों (पानी के टैंकों) में अत्यधिक गंदगी पाई गई तथा समस्त आर.ओ. यंत्र अनुपयोगी स्थिति में मिले, जिससे शुद्ध पेयजल की उपलब्धता शून्य है।

विशेष चिंता का विषय यह रहा कि विद्यालय में नियुक्त परामर्शदाता (काउंसलर) होते हुए भी विद्यार्थियों की मानसिक, भावनात्मक अथवा शैक्षणिक परामर्श की कोई व्यवस्था सक्रिय रूप में संचालित नहीं है।

इस निरीक्षण के पश्चात सदस्या रेनू गौड़ ने विद्यालय प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी तथा समस्त खामियों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को प्रेषित करने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों के हितों की उपेक्षा किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी एवं यदि शीघ्रातिशीघ्र सुधारात्मक कार्यवाही नहीं की गई तो उच्चस्तरीय जांच की संस्तुति की जाएगी।