फर्रुखाबाद:पंजीयन शुल्क जमा प्रणाली में बदलाव से अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक नाराज़, सब रजिस्ट्रार रविकांत यादव के आदेश का किया विरोध।

(द दस्तक 24 न्यूज़) 25 जुलाई 2025 तहसील सदर के सब रजिस्ट्रार रविकांत यादव द्वारा पंजीयन प्रक्रिया में किए गए नए बदलाव को लेकर अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों में भारी आक्रोश है। आज से लागू किए गए आदेश के तहत अब बैनामों का पंजीयन शुल्क कार्यालय में नकद जमा नहीं होगा, बल्कि चालान पास कराकर फतेहगढ़ स्थित स्टेट बैंक में जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस व्यवस्था के कारण आम नागरिकों और अधिवक्ताओं को घंटों की अतिरिक्त मशक्कत और देरी का सामना करना पड़ेगा।

इस आदेश के विरोध में तहसील सदर बार एसोसिएशन और दस्तावेज लेखक संघ के पदाधिकारी एकजुट हो गए। बार एसोसिएशन के सचिव अतुल मिश्रा, संयुक्त सचिव विकास सक्सेना, उपाध्यक्ष योगेश चंद्र दीक्षित, अधिवक्ता जितेंद्र सक्सेना, आकाश दीक्षित, अजय प्रताप सिंह, नरेश गुप्ता तथा दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष विनोद सक्सेना और सचिव मनोज कुमार त्रिवेदी सहित कई सदस्यों ने सब रजिस्ट्रार से शाम को मुलाकात की और विरोध दर्ज कराया।

अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था न केवल अनावश्यक देरी और असुविधा पैदा करेगी, बल्कि भ्रष्टाचार और दलाली को भी बढ़ावा देगी। उन्होंने आश्चर्य जताया कि सब रजिस्ट्रार ने हाल ही में हुई कैश चोरी की घटना में तहसील के मुंशी वर्ग पर संदेह जताते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई, जबकि कथित रूप से विभागीय दोषी कर्मचारी आज भी खुलेआम कार्यालय में कार्यरत हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सब रजिस्ट्रार को स्पष्ट किया कि वे चोरी की घटना के शीघ्र खुलासे के पक्षधर हैं और सहयोग देने को तैयार हैं, लेकिन निर्दोष कर्मचारियों पर संदेह करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सब रजिस्ट्रार ने वर्ष 2022 के जिलाधिकारी आदेश को संशोधित कर 2025 का बताते हुए चस्पा कर दिया, जबकि यदि उक्त आदेश को पूर्व में लागू किया गया होता तो संभवतः चोरी की घटना ही न घटती।

सब रजिस्ट्रार रविकांत यादव ने अपने पक्ष में सफाई देते हुए कहा कि यह बदलाव जिलाधिकारी के निर्देशानुसार किया गया है और सरकारी आदेशों का पालन करना उनकी ज़िम्मेदारी है। फिलहाल यह नया आदेश तहसील परिसर में चर्चा और असंतोष का कारण बना हुआ है। अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस व्यवस्था को तत्काल वापस नहीं लिया गया, तो वे आंदोलनात्मक कदम उठाने को बाध्य होंगे।