फर्रुखाबाद:उत्तर प्रदेश में व्यापारियों पर जीएसटी विभाग की कार्यवाही बनी चिंता का विषय, फर्रुखाबाद उद्योग व्यापार मंडल ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन।

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 24 जुलाई 2025 उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापारियों में भारी असंतोष पनप रहा है। व्यापार संगठनों का आरोप है कि राज्य कर विभाग (GST) द्वारा बीते कुछ महीनों से धारा 79 के तहत जिस प्रकार बैंक खाते सीज कर धनराशि की वसूली की जा रही है, वह न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि व्यापारी गरिमा के भी खिलाफ है।

व्यापारियों का कहना है कि ई-मेल के माध्यम से नोटिस भेजे जाते हैं, जिन्हें कई बार समय से देखा ही नहीं जा पाता। इसके चलते व्यापारी समय रहते अपील नहीं कर पाते और सीधे उनके बैंक खातों से रकम काट ली जाती है या खाते सीज कर दिए जाते हैं। इसके साथ ही जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन में देरी होने के कारण दूसरी अपील की राह भी बंद हो चुकी है, जिससे व्यापारियों को न्याय नहीं मिल पा रहा।

अशोभनीय जब्ती की घटनाएं

हाल ही में झांसी से आई दो घटनाएं व्यापारियों में रोष का कारण बनीं। एक मामले में ₹5000 की वसूली के लिए एक स्कूटी जब्त की गई, जबकि दूसरे मामले में ₹10,000 की वसूली हेतु एक पुराना सोफा सेट जब्त किया गया। व्यापारिक संगठनों ने इसे न केवल गैरजरूरी बल्कि अपमानजनक कार्यवाही बताया है।

घरों तक पहुंच रहे अधिकारी, छोटे कुटीर उद्योग पर दबाव

एटा जिले के जलेसर कस्बे में – जो अपने घुंघरू व घंटा उद्योग के लिए प्रसिद्ध है – अधिकारियों द्वारा कथित रूप से घर-घर जाकर सर्वे और पूछताछ के नाम पर व्यापारियों को परेशान किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इस क्षेत्र के उद्योग कुटीर स्तर पर चलते हैं और उन पर ऐसे दबाव से उनकी आजीविका खतरे में पड़ सकती है।

सचल दल की सख्ती बनी भ्रष्टाचार का कारण

व्यापारियों का यह भी आरोप है कि सचल दल (मूविंग टीम) द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान, तमाम जरूरी दस्तावेज जैसे ई-वे बिल आदि उपलब्ध होने पर भी पेनाल्टी लगाकर जुर्माना वसूला जाता है। अपील के नाम पर रिफंड का झांसा देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।

व्यापारी संगठनों की मांग

व्यापार संगठनों ने सरकार से माँग की है कि—

जीएसटी की दरों को यथासंभव कम किया जाए।

इनकम टैक्स की तरह GST में भी रिवाइज रिटर्न की सुविधा (धारा 4.1 के अंतर्गत) दी जाए।

राज्य कर विभाग द्वारा व्यापारियों पर की जा रही अपमानजनक कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।

जीएसटी अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि वे विवेकपूर्ण तरीके से कार्य करें।

व्यापारियों के पंजीकृत कर सलाहकारों की सूची सार्वजनिक की जाए जिससे लंबित मामलों का समाधान प्रभावी रूप से हो सके।

निष्कर्ष

व्यापारियों का कहना है कि वे कर देने के पक्षधर हैं, लेकिन उत्पीड़न, अपमानजनक जब्ती व अनावश्यक दबाव से सरकार की छवि खराब हो रही है। व्यापारियों ने मांग की है कि मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर व्यापारिक माहौल को सहज बनाएं।