पटना,(द दस्तक 24 न्यूज़) 28 जून 2025 बिहार की राजधानी पटना के विद्यापति मार्ग स्थित विद्यापति भवन में आयोजित “महाबोधि बौद्ध विरासत (बोधगया) बचाओ सम्मेलन” में पूर्व मंत्री और समाजवादी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया। यह सम्मेलन देश-विदेश से आए हुए बौद्ध भिक्षुओं, बौद्ध विचारकों तथा बौद्ध उपासक-उपासिकाओं की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का उद्देश्य बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर, विशेषकर बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर की सुरक्षा, संरक्षण एवं उसमें बौद्ध अनुयायियों की गरिमामयी भूमिका सुनिश्चित करना रहा।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा:
“बोधगया बौद्ध धर्म का केंद्र बिंदु है। यह केवल बिहार या भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों की आस्था का प्रतीक है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी वहां बौद्ध भिक्षुओं की उपेक्षा हो रही है और धार्मिक व्यवस्थाओं पर उनका अधिकार सीमित है। यह सम्मेलन एक क्रांतिकारी प्रयास है, जिससे बौद्ध समुदाय की आवाज़ न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर गूंजेगी।”
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए बौद्ध भिक्षुओं और विचारकों ने महाबोधि मंदिर की वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए वहाँ बौद्ध भिक्षु प्रबंधन की पुनः स्थापना की मांग की। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार से अपील की गई कि वे महाबोधि मंदिर को “बौद्ध अनुयायियों की आत्मा” के रूप में मान्यता दें और यूनेस्को द्वारा घोषित इस विश्व धरोहर स्थल की बौद्ध परंपराओं के अनुरूप देखरेख सुनिश्चित करें।
सम्मेलन की प्रमुख बातें:
महाबोधि मंदिर की सुरक्षा एवं प्रबंधन में बौद्ध भिक्षुओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग।
सरकार से मंदिर के संचालन में पारदर्शिता और धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों का पालन कराने की अपील।
बौद्ध सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जनआंदोलन खड़ा करने का आह्वान।
सम्मेलन में बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली सहित कई प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। स्वामी प्रसाद मौर्य की सक्रिय भागीदारी और बौद्ध समुदाय के पक्ष में दिया गया वक्तव्य सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण रहा।
यह सम्मेलन न केवल बौद्ध समाज के लिए एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान की लड़ाई को एक नई दिशा देने वाला कदम साबित हुआ।
