टीम इंडिया के लिए इंग्लैंड दौरे की शुरुआत उतनी ही चुनौतीपूर्ण रही, जितनी शुरू से उम्मीद की जा रही थी. लीड्स में खेले गए पहले टेस्ट में शुभमन गिल की अगुवाई वाली भारतीय टीम को 5 विकेट से हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, मैच में भारतीय टीम ने कई रिकॉर्ड तोड़े, 5 शतकों के बावजूद हार ने ज़ख्म कुछ और गहरा कर दिया. अब भारत को दूसरा टेस्ट जीतकर सीरीज में बराबरी हासिल करनी है, लेकिन इसके लिए उसे इतिहास के सबसे कठिन अध्याय को पलटना होगा,जिसके लिए एजबेस्टन में जीत हासिल करनी होगी, जहां भारत ने पिछले 58 साल में एक भी टेस्ट मैच नहीं जीता है. पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का अगला मुकाबला 2 जुलाई से बर्मिंघम के एजबेस्टन स्टेडियम में खेला जाएगा. यह वही मैदान है जहां भारत ने 1967 में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था और 132 रन से हार का सामना करना पड़ा था.तब से लेकर आज तक भारत ने यहां 8 टेस्ट मैच खेले हैं,जिनमें 7 में हार मिली और सिर्फ 1 मैच ड्रॉ रहा. 39 साल पहले 1986 में आखिरी बार टीम इंडिया ने इस मैदान पर हार से बचने में कामयाबी पाई थी.
इतना ही नहीं, पिछली बार जब भारत ने एजबेस्टन में टेस्ट खेला था, तब जसप्रीत बुमराह कप्तान थे और इंग्लैंड ने 373 रन का लक्ष्य 7 विकेट शेष रहते आसानी से चेज कर लिया था. वो इंग्लैंडे के ‘बैजबॉल युग’ की शुरुआत थी और भारतीय गेंदबाजी के लिए एक चेतावनी भी.संयोग से इस बार बुमराह एजबेस्टन में खेल भी नहीं पाएंगे. शुभमन गिल की कप्तानी में भारत ने लीड्स में बल्लेबाजी में सकारात्मक संकेत दिए थे. टीम ने कुल 835 रन बनाए और 5 बल्लेबाजों ने शतक जड़े. इसके बावजूद जीत टीम के हाथ नहीं लगी, क्योंकि इंग्लिश बल्लेबाजों ने चौथी पारी में 371 रन का पीछा कर लीड्स में इतिहास रच दिया. अब अगर भारत को सीरीज में वापसी करनी है, तो एजबेस्टन में इतिहास रचना होगा,जहां जीत तो दूर, हार से बचना भी टेढ़ी खीर साबित हुआ है.
टीम इंडिया अब बर्मिंघम पहुंच चुकी है और सबकी नजरें 2 जुलाई से शुरू होने वाले टेस्ट पर टिकी हैं. युवा कप्तान गिल के पास न सिर्फ सीरीज बराबर करने का मौका है, बल्कि वो इतिहास बदलने वाले कप्तानों की लिस्ट में अपना नाम दर्ज कर सकते हैं.
