कासगंज: जनपद के पटियाली विधानसभा क्षेत्र में हर साल आने वाली गंगा की बाढ़ अब ग्रामीणों के लिए त्रासदी बन चुकी है। इस क्षेत्र के करीब 52 गांव बाढ़ के पानी से घिर जाते हैं, जिससे हजारों बीघा खेती बर्बाद हो जाती है। खेतों में खड़ी फसल डूब जाती है और ग्रामीणों की साल भर की मेहनत पानी में बह जाती है।
इस बार भी कादरगंज, खाम, हिम्मतनगर, बजेरा समेत कई गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर बाढ़ के पानी को रोकने की कोशिश की। ओर ग्रामीणों कि मेहनत रंग लाई
हर साल की आपदा, लेकिन स्थायी समाधान नहीं
ग्रामीण बताते हैं कि बाढ़ का खतरा हर साल अगस्त-सितंबर के दिनों में मंडराता है। पानी का स्तर बढ़ने से न केवल फसलें बर्बाद होती हैं, बल्कि कई घर भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजे के नाम पर “ठेंगा” दिखा दिया जाता है। वर्षों से जिन किसानों की जमीन और फसलें बर्बाद हो रही हैं, उन्हें एक भी पैसा मुआवजा नहीं मिला। गरीब और मजदूर किसान अपनी खेती से ही बच्चों की पढ़ाई, शादी-ब्याह और परिवार का खर्च चलाते हैं, लेकिन बाढ़ उनकी रोजी-रोटी पर हर साल गहरी चोट करती है।
मुख्यमंत्री का दौरा, लेकिन वादे अधूरे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आज तक किसी भी किसान को मुआवजा नहीं मिला। लोग सवाल कर रहे हैं— “आखिर कब तक यह सिलसिला चलेगा? कब हमारी आवाज मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी? कब मिलेगा हमें हमारी मेहनत का हक?”
ग्रामीणों की मांग
★स्थायी और मजबूत बांध का निर्माण
हर साल बाढ़ प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा
★फसल और जमीन के नुकसान का वैज्ञानिक सर्वे
★आपदा प्रबंधन दल की सक्रिय तैनाती
कासगंज का यह बाढ़ संकट सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी नतीजा है। जब तक ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जाएगा, तब तक हर साल गंगा का उफान यहां के किसानों और मजदूरों की जिंदगी में तबाही लाता रहेगा।
