पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव किस रूप में याद किए जाएंगे ?

पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत नरसिम्हा राव को आने वाली पीढ़ी आधुनिक भारत के शिल्पी के तौर पर याद करेगी या उनके शासन में बाबरी विध्वंस के लिए कोसेगी यह अब भी अहम सवाल है। कई भाषाओं के जानकार और विद्वान नरसिम्हा राव की राजनीतिक विरासत में 6 दिसंबर 1992 की तारीख हमेशा एक अलग ही बयां देगी। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद भी बीते तीन दशक का वह सवाल कि क्या राव ढांचे को गिराने से बचा सकते थे? हमेशा लोगों के मन में जिंदा रहेगा। इस फैसले के साथ…

मोदी के दूसरे राज के छह महीने में निपटाए गए तीन बड़े मामले

मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल की छह महीने की छोटी अवधि में ही दशकों पुराने तीन मुद्दों (अनुच्छेद 370, राम मंदिर और समान नागरिक संहिता) में से दो मुद्दों का हल निकाल लिया। अनुच्छेद 370 निरस्त करने के बाद शुक्रवार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का राह प्रशस्त हुआ। इससे पहले सरकार ने तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाया। हालांकि भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति की झोली में अब सिर्फ समान नागरिक संहिता का मुद्दा नहीं बचा है। इससे पहले सरकार धर्मांतरण विरोधी कानून, नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय…

मंदिर-मस्जिद आंदोलन से जुड़े चर्चित चेहरों की कहानी

मुस्लिम पक्ष के चर्चित चेहरे हामिद अंसारी साल 1949 से ही बाबरी मस्जिद के सबसे प्रमुख पैरोकार रहे हामिद अंसारी का 95 साल की आयु में 20 जुलाई 2016 को निधन हो गया था। पहले साइकिल फिर दर्जी की दुकान खोलने वाले अंसारी 1961 में बाबरी मस्जिद के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से दायर मुकदमे में मुद्दई थे। अंसारी ने ही 1986 में राजीव सरकार द्वारा ताला खोलने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमा किया। उनकी राम मंदिर के पैरोकार परमहंस रामचंद्र दास से दोस्ती हमेशा चर्चा में…

150 वर्षों से चले आ रहे वो मुद्दे और उनके निष्कर्ष, जिन्हें SC ने किया बहस से बाहर

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में अयोध्या मामले से जुड़े ऐसे मुद्दों को हमेशा के लिए बहस से बाहर कर दिया है, जो पिछले करीब डेढ़ सौ वर्षों से भारतीयों के बीच बने हुए थे। इन विषयों पर हिंदू-मुस्लिम पक्षकारों को सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट अपना निर्णय 2010 में दे चुकी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जहां कई निर्णयों को बदला, वहीं कुछ में हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार भी रखा। पढ़िए ऐसे मुद्दों और उनके निष्कर्षों को जो अब हमारे बीच विवाद का विषय नहीं बनेंगे। जब ढांचा…

अयोध्या केस पर SC के फैसले से संतुष्ट नहीं मुस्लिम पक्ष, कहा- मस्जिद के लिए अलग जमीन देना ठीक नहीं

अयोध्या केस पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने नाखुशी जाहिर की है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. हम पुनर्विचार की मांग करेंगे. उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं. यह फैसला किसी की जीत या हार नहीं है. सुन्नी वक्फ बोर्ड का कहना है कि आगे की रणनीति तय की जाएगी. इसके लिए आपस में बात करेंगे. साथ ही हम हर किसी से शांति बनाए रखने की…