पटना:(द दस्तक 24 न्यूज़) 07 जुलाई 2025 बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर आज नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पटना में एक अहम प्रेस वार्ता की। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग पूरी तरह से कन्फ्यूज्ड (भ्रमित) नजर आ रहा है और एक ही दिन में तीन अलग-अलग दिशा-निर्देश जारी करना किसी मजाक से कम नहीं।
तेजस्वी यादव ने कहा कि लोकतंत्र की पवित्रता को बनाए रखने की जिम्मेदारी जिस संस्था पर है, उसी के विज्ञापनों और सोशल मीडिया पोस्टों में गंभीर विरोधाभास सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 6 जुलाई को ECI बिहार कार्यालय ने दो फेसबुक पोस्ट जारी किए:
🔹 पहला पोस्ट (दोपहर 2 बजे): “दस्तावेज़ बाद में भी दिए जा सकते हैं”
🔹 दूसरा पोस्ट (3 बजे): “दस्तावेज़ 25 जुलाई तक ही दिए जा सकते हैं”
जबकि 24 जून 2025 को आयोग ने जो आधिकारिक आदेश जारी किया था, उसमें 11 निर्धारित दस्तावेज़ों और फ़ोटो की अनिवार्यता की बात कही गई थी। वहीं अब 7 जुलाई को बिहार के समाचार पत्रों में प्रकाशित पूर्ण पृष्ठीय विज्ञापन में कहा गया है कि “यदि दस्तावेज़ और फोटो उपलब्ध नहीं हो, तो भी गणना प्रपत्र भरकर BLO को दें।”
तेजस्वी यादव ने पूछा, “आख़िर आयोग की वास्तविक नीति क्या है? क्या अब विज्ञापन और सोशल मीडिया पोस्ट संविधानिक संस्था की नीति का वाहक बन गए हैं?”
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल
उन्होंने कहा कि आयोग की यह अस्पष्टता आम जनता में अविश्वास पैदा कर रही है। यदि दस्तावेज़ों के बिना फॉर्म भरवाए जा रहे हैं, तो इससे यह संदेह उत्पन्न हो रहा है कि बाद में राजनीतिक प्राथमिकताओं के अनुसार नामों में हेरफेर की जा सकती है। क्या यह सुविधा है या पूर्व नियोजित योजना?
तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग द्वारा साझा किए जा रहे आँकड़े “Eye Wash” हैं, जो ज़मीनी हकीकत से दूर हैं। उन्होंने कहा, “निर्वाचन आयोग जैसी संस्था की साख पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।”
तेजस्वी यादव की प्रमुख माँगें:
1. चुनाव आयोग एक स्पष्ट, लिखित और आधिकारिक आदेश तत्काल जारी करे।
2. विज्ञापन या फेसबुक पोस्ट के बजाय राजपत्र अधिसूचना या सार्वजनिक प्रेस नोट के माध्यम से नीति स्पष्ट की जाए।
3. बिना दस्तावेज़ प्राप्त फॉर्मों के दुरुपयोग की आशंका के मद्देनज़र स्वतंत्र निगरानी तंत्र गठित किया जाए।
4. मतदाता नामांकन और विलोपन की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और राजनीतिक निरपेक्षता सुनिश्चित की जाए।
5. आयोग विपक्ष एवं जनता द्वारा उठाए गए प्रश्नों का बिंदुवार उत्तर दे।
तेजस्वी ने पूछे यह 7 अहम सवाल:
1. क्या चुनाव आयोग केवल उन्हीं 11 दस्तावेज़ों को मान्यता देने का अधिकार रखता है?
2. सरकार द्वारा जारी आधार कार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड आदि क्यों अस्वीकार किए जा रहे हैं?
3. आधार कार्ड जारी करते समय सरकार कई प्रमाणपत्र लेती है, तो उसे अब मान्यता क्यों नहीं मिल रही?
4. 11 दस्तावेज़ों की सूची किस प्रक्रिया से तय हुई? क्या यह न्यायसंगत और संवैधानिक है?
5. बिहार के 4 करोड़ प्रवासी 18 दिन की समयसीमा में कैसे दस्तावेज़ सत्यापन करा पाएंगे?
6. क्या आयोग विधानसभा वार डैशबोर्ड के ज़रिए प्रतिदिन की स्थिति सार्वजनिक करेगा?
7. BLO के साथ लगाए गए 4 वॉलंटियर्स कौन हैं, उनकी योग्यता और चयन प्रक्रिया क्या है? क्या उनकी सूची सार्वजनिक की जाएगी?
तेजस्वी यादव ने अंत में कहा कि यह सब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत के लोकतंत्र की बुनियाद से जुड़ा सवाल है। यदि निर्वाचन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तो लोकतंत्र का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
यह मुद्दा अब केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान, न्याय, और लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा है।
