दो साल के अंदर 11 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। वेंटिलेटर पर लेटी कांग्रेस को नया जीवन चाहिए। नेता के रूप में ‘सब्जेक्टली फेल’ हुए प्रशांत किशोर के सामने वजूद का संकट है। अब वे कम से कम रणनीतिकार के रूप में खुद को जिंदा रखना चाहते हैं। वे राहुल गांधी की तुलना में प्रियंका गांधी के सामने ज्यादा कम्फर्टेबल हैं, इसलिए उन्होंने प्रियंका गांधी से मुलाकात की। लाचार और बीमार की तरह दोनों कड़वी गोली खाने पर मजबूर हैं। सियासत में कोई बात तभी छिपाई जाती है, जब कोई गंभीर खिचड़ी पक रही हो। प्रियंका गांधी, प्रशांत किशोर से मुलाकात को हंसी में उड़ाकर उस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही हैं। जाहिर है अंदरखाने में कुछ बड़ा करने की योजना बन रही हैं। चूंकि, एक बार पहले प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच बहुत कड़वाहट के साथ डील टूट चुकी है। इसलिए इस बार मामला मुकम्मल तौर पर पकने तक रसोईघर की खिड़कियों पर पर्दा डाल दिया गया है। प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर में दो घंटे तक बंद कमरे में बात हो और उसे महत्वहीन मान लिया जाए, ऐसा हो नहीं सकता।
क्या कांग्रेस में शामिल होंगे प्रशांत किशोर?
