केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस वर्ष रविवार एक फरवरी को बजट पेश करेंगी। बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा जो 2 अप्रैल तक चलेगा। इस समय देश की अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी स्थिति में बनी हुई है। जीएसटी कर संग्रह लगातार ऊंचा बना हुआ है। लगभग सभी वित्तीय एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि इस वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.6 प्रतिशत से लेकर 7.4 प्रतिशत के बीच बढ़ोतरी हासिल कर सकती है। इसे देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वर्ष केंद्रीय वित्त मंत्री बजट में ऐसे उपाय करेगी जिससे व्यापार में वृद्धि दर बनी रहे। लेकिन क्या आयकर दाताओं को एक बार फिर कोई बड़ी छूट मिल सकती है? 2025-26 के बजट में केंद्र सरकार ने आयकर में भारी छूट दी थी। केंद्र सरकार ने बुनियादी छूट की सीमा चार लाख रूपये तक बढ़ा दी थी। लेकिन सेक्शन 87ए के अंतर्गत 12 लाख रूपये तक की टैक्स योग्य आय की छूट सीमा 60 हजार रुपये तक बढ़ा दी गई है। इसका अर्थ है कि प्रतिवर्ष 12 लाख रूपये तक की कमाई करने वाले लोग विभिन्न योजनाओं में निवेश कर पूरी छूट प्राप्त कर लेते हैें और व्यावहारिक तौर पर उन्हें कोई कर नहीं देना होता। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रूपये कर दी गई थी।
जीएसटी दरों में राहत को केंद्र सरकार का बड़ा सुधारवादी कदम माना गया। कहा गया कि इसका अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर देखने को मिल सकता है। अब सिन गुड्स की कैटेगरी में 40 प्रतिशत के दायरे में आने वाली पान मसाला, सिगरेट और शराब जैसी वस्तुओं को छोड़ दें तो आम आदमी के उपयोग में आने वाली 95 फीसदी वस्तुएं शून्य या पांच प्रतिशत जीएसटी दायरे में आ गई हैं। 18 फीसदी के दायरे में बहुत कम वस्तुएं हैं। इससे उत्पाद सस्ते हुए हैं और इनकी खपत में वृद्धि अर्थव्यवस्था में तेजी का आधार बनी है। इससे आम आदमी को अपने उपयोग की सामग्री खरीद सकने की क्षमता बढ़ी है।
केंद्र सरकार के इस कदम को अर्थव्यवस्था को तेज करने वाला माना गया था। केंद्र सरकार का अनुमान था कि कर बचत से लोग बचत राशि को खाने-पीने, घूमने और आवश्यक वस्तुओं की खरीद में निवेश करेंगे। फिलहाल, आंकड़ों की बात करें तो ट्रंप के टैरिफ वॉर के बाद भी जिस तरह भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी दिखाई दे रही है, उससे लगता है कि केंद्र सरकार का दांव बेहद सटीक रहा है।
