बीते 03 फरवरी 2026 को नेटफ्लिक्स ने अपने साल 2026 के लिए ‘इंडिया प्लान’ का एलान किया। कई फिल्मों और सीरीज से पर्दा उठाया गया। इसी कड़ी में मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ का एलान भी टीजर रिलीज करके किया गया। मगर, इसी के साथ इस पर विवाद शुरू हो गया। विवाद इस फिल्म के टाइटल की वजह से है। मामला कोर्ट में है। कलाकार और निर्माता सफाई पेश कर चुके हैं। जानिए इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ का आधिकारिक एलान नेटफ्लिक्स के एक इवेंट में किया गया। इसमें मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभा रहे हैं। उनके किरदार का नाम अजय दीक्षित है, लेकिन पुलिस महकमे में उन्हें ‘पंडित’ कहा जाता है। फिल्म के निर्देशन की कमान रितेश शाह ने संभाली है। वहीं, इसे नीरज पांडे ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म के टाइटल की रिलीज के साथ इसके खिलाफ विरोध के सुर उठने लगे। उत्तर प्रदेश में इसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। वहीं, कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ विवाद के बाद उत्तर प्रदेश के लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है, जबकि NHRC ने एक शिकायत के बाद सूचना और प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह शिकायत दर्ज हुई है। आरोप है कि फिल्म में धार्मिक और जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचने की कोशिश की गई है। लखनऊ कमिशनरेट का कहना है कि समुदाय की भावना को आहत करने और शांति व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लखनऊ पुलिस कमिशनरेट की तरफ से इस संबंध में प्रेस नोट भी जारी किया गया।
फिल्म के टाइटल पर विरोध प्रदर्शन होने के बाद मनोज बाजपेयी और निर्माता नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पोस्ट शेयर कर सफाई पेश की। आज शुक्रवार को उन्होंने कहा कि ‘घूसखोर पंडित’ की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है, जिसमें कुछ कमियां हैं और इसका किसी जाति या समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्वीकार किया कि फिल्म के टाइटल ने दर्शकों के एक वर्ग को ‘दुख’ पहुंचाया है और कहा कि फिल्म के सभी प्रमोशनल मटीरियल फिलहाल हटा दिए जाएंगे। फिलहाल नेटफ्लिक्स के इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्म का टीजर उपलब्ध नहीं है।
