दौसा में ट्रेनी सब इंस्पेक्टर की मौत: एक युवा के सपनों को लील गई शैक्षिक व्यवस्था की विफलता

दौसा:(द दस्तक 24 न्यूज़) 18 सितंबर 2025 जिले से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। 27 वर्षीय ट्रेनी सब इंस्पेक्टर राजेंद्र सैनी का शव देर रात दौसा रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर मिला। माना जा रहा है कि ट्रेन की चपेट में आने से उनकी मौत हुई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। घटना की जानकारी मिलते ही दौसा विधायक डीडी बैरवा भी अस्पताल पहुंचे।

राजेंद्र धौलपुर पुलिस लाइन में प्रशिक्षणरत थे और फिलहाल दौसा में अपने भाई के पास रहकर ईओ भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। परिजनों ने बताया कि हाल ही में भर्ती परीक्षा रद्द होने से वह गहरे तनाव में थे। घर की आर्थिक जिम्मेदारी और नौकरी को लेकर दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया।

परिजनों का दर्द:

राजेंद्र के परिवार वालों का कहना है कि वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाए हुए थे। नौकरी ही उनका सपना नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीदों का सहारा भी थी। लेकिन जब बार-बार होने वाली परीक्षा लीक और भर्ती रद्द होने जैसी घटनाओं से उनका मनोबल टूटा, तो उन्होंने निराशा में यह कदम उठा लिया।

युवाओं की टूटी उम्मीदें

यह सिर्फ राजेंद्र सैनी की मौत नहीं है, बल्कि हजारों युवाओं के सपनों और विश्वास की भी मौत है। प्रदेश में हर साल प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं आम हो गई हैं। मेहनत करने वाले युवाओं की कड़ी मेहनत और वर्षों की तैयारी इन घटनाओं की भेंट चढ़ जाती है।

इसी व्यवस्था की खामियों ने एक और युवा की जान ले ली। इसे आत्महत्या कहना आसान है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह एक “शैक्षिक व्यवस्था द्वारा की गई हत्या” है।

जिम्मेदार कौन?

पेपर माफिया और नकल गिरोह, और साथ ही वे अधिकारी जो जिम्मेदारी लेने से बचते हैं। जब तक इन पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे रुकना मुश्किल है।

ठोस समाधान की मांग

युवाओं और सामाजिक संगठनों ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि कानूनी और तकनीकी दोनों स्तरों पर ठोस कदम उठाए जाएं:

पेपर लीक एक्ट –पेपर लीक के मामलों में दोषियों को कम से कम 7 साल की अनिवार्य सजा और उनकी समस्त संपत्ति जब्त करने का प्रावधान हो।

AI और साइबर निगरानी –पेपर बनाने से लेकर छपाई, ट्रांसपोर्ट और सुरक्षित रखने तक की पूरी प्रक्रिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी लागू की जाए। संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत रियल-टाइम अलर्ट मिले।

युवाओं का भविष्य सुरक्षित –सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए कि हर युवा को यह भरोसा दिलाया जाए कि उसकी मेहनत और ईमानदारी का फल उसे जरूर मिलेगा।

राजेंद्र की आखिरी पुकार

राजेंद्र सैनी की मौत सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। यह हमें याद दिलाती है कि अगर अब भी व्यवस्था नहीं सुधरी, तो न जाने कितने और सपने इसी तरह बिखर जाएंगे।

उनकी आत्मा मानो हमसे कह रही है –”मेरी मौत व्यर्थ न जाए, इस व्यवस्था को बदलने का संकल्प लो।”

अब समय है कि सरकार और प्रशासन युवाओं की आवाज़ सुने और ऐसी सख्त व्यवस्था लागू करे, जिससे किसी और राजेंद्र को अपनी जान न गंवानी पड़े।