कांग्रेस की खोयी जमीन ऐसे वापस लाए मनमोहन सिंह, इन तीन मोर्चों पर बने संकट मोचक ?

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के बारे में जब भी बात की गई तब उनके बतौर वित्त मंत्री आर्थिक उदारीकरण या बतौर पीएम लिए गए फैसलों के बारे में ही अधिक बात हुई। बतौर राजनेता उनके योगदान को कम आंका गया। कहा गया कि मनमोहन सिंह सरकार में CEO हैं, लेकिन आम राय के उलट कांग्रेस के उभरने में मनमोहन सिंह का बड़ा योगदान माना गया। खासकर तीन मोर्चों पर उनका योगदान पार्टी कभी नहीं भूल सकती है .

मिडल क्लास को खींचा

90 के दशक में कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर होती गई। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में BJP ने खासकर शहरी और मिडल क्लास वोटर के बीच बढ़त ले ली। कांग्रेस का उनके बीच जनाधार लगातार कम होता गया। 2004 में अप्रत्याशित जीत के बाद जब मनमोहन सिंह पीएम बने तो उन्होंने खामोशी से इन तबकों के बीच कांग्रेस का जनाधार वापस हासिल किया। 2009 में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत के पीछे इसी तबके का योगदान माना गया। चुनावी आंकड़ों ने साबित किया 2009 में हाल के वर्षों में कांग्रेस को सबसे अधिक शहरी और मिडल क्लास का वोट मिला। वह मिडल क्लास के हीरो बनकर उभरे। हालांकि, विडंबना रही कि उनके दूसरे टर्म के अंत में यही तबका एक बार फिर कांग्रेस से नाराज हुआ और इसी तबके की नाराजगी से UPA-2 को हार का सामना करना पड़ा और आज तक कांग्रेस फिर उस वोट को दोबारा हासिल नहीं कर सकती है।

सिख आबादी से दोबारा कनेक्ट

1984 दंगों के बाद कांग्रेस का सिखों के साथ सियासी संबंध ढलान पर रहा। दंगों में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठे। इनके बीच मनमोहन सिंह पार्टी के सिख चेहरे बने। माना गया कि 2004 में पहले सिख पीएम बनने के बाद कहीं न कहीं गुस्सा और नाराजगी समाप्त हो गई और बाद के वर्षों में कांग्रेस को उनका वोट दोबारा मिला। सिख समुदाय के बीच उनका बड़ा सम्मान था। 11 अगस्त 2005 को संसद के पटल पर उनका 1984 दंगों के लिए माफी मांगना एक बड़ा साहसी और बड़े दिल वाला कदम बताया गया। इसका बड़ा असर हुआ। कांग्रेस ने फिर पंजाब में भी सत्ता हासिल की थी।

संकट मोचक भी थे

उनके एक योगदान के बारे में भी बहुत कम चर्चा हुई। वह कई बार पार्टी के लिए संकट मोचक की भूमिका निभाते थे। जब भी पार्टी या सहयोगियों के साथ मनमुटाव की खबरें आती थीं, सोनिया गांधी उसमें हल निकालने के लिए या तो अहमद पटेल या मनमोहन सिंह पर ही भरोसा करती थीं। वह अपने विनम्र व्यवहार के कारण नाराजगी को कम करने में कई मौकों पर सफलता पाते थे।