धर्मगुरु युग महापंडित भदंत ज्ञानेश्वर की आजीवन प्रतिबद्धता और अमूल्य योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा

भदंत ज्ञानेश्वर के निधन पर कई राजनीतिक और सामाजिक लोगों ने अग्ग महापंडित भदंत ज्ञानेश्वर महास्थवीर के निधन पर शोक जता रहे हैं. म्यांमार मंदिर में उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है. बौद्ध भिक्षु संघ के अध्यक्ष भदंत ज्ञानेश्वर महास्थविर का लखनऊ के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया था . देश-विदेश के बौद्ध अनुयायियों के दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर 10 नवंबर तक डीप फ्रीजर में रखा गया है. 11 नवंबर को नगर भ्रमण के बाद बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार म्यांमार मन्दिर में ही पीछे की तरफ निर्धारित स्थान पर किया जाएगा. भदंत ज्ञानेश्वर ने कुशीनगर में बौद्ध भिक्षु संघ के अध्यक्ष के रूप में बौद्ध धर्म के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

कौन थे भंते ज्ञानेश्वर : इस पर बौद्ध भिक्षु अलोक जी ने बताया की गुरु जी की यही इच्छा थी कि सही बौद्ध भिक्षुओं में आपसी प्रेम रहे. इस 10 नवंबर को गुरुजी का जन्मदिवस है. हम सभी लोगों की दिली इच्छा थी कि इस वर्ष उनका जन्मदिवस बहुत ही धूम धाम से मनाया जाएगा, लेकिन उसके पहले ही गुरु जी का देहावसान हो गया. गुरु जी की 11 नवंबर को नगर भ्रमण करने की आखिरी इच्छा थी, वह कराई जाएगी.

पूजनीय भंते ज्ञानेश्वर का जन्म 1936 में बर्मा (म्यांमार) में हुआ था.वो 1963 में वे भारत आ गए थे.उन्होंने कुशीनगर में सबसे पहले वर्मा बुद्ध मंदिर की स्थापना की. उनका जीवन बुद्ध की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार में समर्पित रहा. भारत सरकार ने 1977 में उन्हें भारतीय नागरिकता दी थी. उसके बाद से वे कुशीनगर में ही रहे. बौद्ध धर्म में उनके योगदान को देखते हुए म्यांमार सरकार ने 2021 में उन्हें अपने सर्वोच्च सम्मान ‘अभिध्वजा महारथा गुरु’ से अलंकृत किया था.

भदंत ज्ञानेश्वर ने कुशीनगर में वर्मीज पैगोडा का निर्माण कराया, जो आज अंतरराष्ट्रीय श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र है.वो बौद्ध संस्थान के अध्यक्ष भी रहे. उनके शिष्य देश-विदेश में फैले हुए हैं.