बुलंदशहर की 30 वर्षीय महिला के गर्भ का चौंकाने वाला मामला: यूट्रस नहीं, लीवर में पल रहा था 12 हफ्ते का भ्रूण!

(द दस्तक 24 न्यूज़) ,06 अगस्त 2025 उत्तर प्रदेश चिकित्सा जगत को हैरान कर देने वाला एक बेहद दुर्लभ मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से सामने आया है। यहां एक 30 वर्षीय महिला के गर्भ का पता ऐसे स्थान पर चला, जिसकी कल्पना तक करना मुश्किल है उसका 12 सप्ताह का भ्रूण गर्भाशय (यूट्रस) में नहीं, बल्कि लीवर के दाहिने हिस्से में विकसित हो रहा था।

पिछले दो महीनों से महिला को पेट में लगातार दर्द और उल्टी की शिकायत हो रही थी। तमाम इलाजों के बावजूद जब उसे कोई राहत नहीं मिली, तो चिकित्सकों ने एमआरआई जांच की सलाह दी। एमआरआई रिपोर्ट देखकर डॉक्टर भी अवाक रह गए — महिला गर्भवती थी, लेकिन उसका यूट्रस खाली था।

इस अनोखे और चौंकाने वाले मामले की पुष्टि जाने-माने रेडियोलॉजिस्ट डॉ. के.के. गुप्ता ने की। उन्होंने बताया, मैं अपने 20 से अधिक वर्षों के करियर में पहली बार ऐसा मामला देख रहा हूं। पूरी दुनिया में ऐसे अब तक केवल 18 केस सामने आए हैं, और संभवतः यह भारत में पहला मामला हो सकता है। एमआरआई में स्पष्ट देखा गया कि भ्रूण पूरी तरह जीवित था और उसमें धड़कन भी थी, लेकिन वह पूरी तरह से यूट्रस से बाहर, लीवर की ओर स्थित था।

क्या है ये स्थिति ?

इस असामान्य स्थिति को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic Pregnancy) कहा जाता है, जिसमें भ्रूण यूट्रस के बाहर किसी अन्य अंग में विकसित होने लगता है। अधिकांश एक्टोपिक प्रेग्नेंसी फेलोपियन ट्यूब में पाई जाती हैं, लेकिन लीवर जैसी जगह पर भ्रूण का विकसित होना बेहद दुर्लभ और खतरनाक होता है।

चिकित्सकों के लिए चुनौती

डॉक्टर्स के सामने अब यह सबसे बड़ी चुनौती है कि इस स्थिति को कैसे संभाला जाए। क्योंकि लीवर में भ्रूण का विकास होना जानलेवा हो सकता है ,मां के जीवन के लिए भी और भ्रूण के लिए भी।

आगे क्या ?

फिलहाल, महिला को विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है और उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों से परामर्श लिया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम स्थिति का बारीकी से मूल्यांकन कर रही है ताकि मां की जान को किसी प्रकार का खतरा न हो। यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि समय रहते सटीक जांच और विशेषज्ञों से परामर्श कितना जरूरी है।