राजस्थान में स्कूल जर्जर, मंत्री लेंगे 55 लाख की फॉर्च्यूनर, कांग्रेस ने उठाए सवाल

राजस्थान में एक तरफ फंड की कमी की वजह से सरकारी स्कूल जर्जर अवस्था में हैं और उनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है. वहीं दूसरी तरफ सरकार अपने मंत्रियों के लिए तकरीबन 55 लाख रुपए की कीमत वाली नई फॉर्च्यूनर गाड़ियां खरीद रही है. इस पर कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकार की दलील है कि मंत्रियों को दौरों के दौरान दिक्कत होती है चार साल पुरानी गाड़ियों के खराब होने का डर बना रहता है. इस वजह से महंगी लग्जरी फॉर्च्यूनर कार खरीदने का फैसला कतई गलत नहीं है. हालांकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस मंत्रियों के लिए फॉर्च्यूनर खरीदे जाने पर ऐतराज जताते हुए न सिर्फ सवाल उठा रही है, बल्कि इसे गैरजरूरी भी बता रही है.

राजस्थान में इन दिनों मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और दोनों डिप्टी सीएम को मिलाकर मंत्रियों की संख्या चौबीस है. मुख्यमंत्री समेत ज्यादातर मंत्री अभी इनोवा की सवारी कर रहे हैं. कुछ मंत्री अपनी निजी फॉर्च्यूनर से भी चलते हैं.

सरकार ने पिछले दिनों फैसला किया था कि सभी मंत्रियों के साथ ही कुछ अन्य प्रमुख पदों पर बैठे लोगों को अब नई लग्जरी फॉर्च्यूनर कार की सवारी कराई जाएगी. इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर उसे मुख्यमंत्री ऑफिस भेजा गया.

मुख्यमंत्री ऑफिस ने पहले चरण में सभी मंत्रियों के लिए फॉर्च्यूनर गाड़ियां खरीदने की मंजूरी दे दी. इसके लिए बजट को भी मंजूरी दे दी गई. मंत्रियों के लिए फॉर्च्यूनर के जिस लग्जरी मॉडल को खरीदने का बजट मंजूर हुआ है, उसकी कीमत 54 लाख रुपए प्रति वाहन है.

इस बीच यह तय किया गया था कि कुल 41 लग्जरी फॉर्च्यूनर खरीदी जानी है. पहले चरण में फिलहाल 24 मंत्रियों के लिए ही गाड़ियों की खरीद के मंजूरी दी गई है. दस फॉर्च्यूनर सरकार के पास आ भी चुकी हैं. सरकार चाहती है कि ये फॉर्च्यूनर गाड़ियां विधानसभा का शीतकालीन और बजट सत्र खत्म होने के बाद ही मंत्रियों को दी जाएं, ताकि सियासी कोहराम होने से बचा जा सके.

इस बारे में कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि एक तरफ सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग्स गिर रही हैं. बच्चों की मौत हो रही है. मिड डे मील बनाने वाले रसोइयों को 7 महीने से मानदेय नहीं मिल सका है.

उन्होंने कहा कि ऐसे में मंत्रियों के लिए लग्जरी फॉर्च्यूनर खरीदने का फैसला व्यवस्था का मजाक उड़ाने जैसा है. उनके मुताबिक मंत्रियों के लिए नई गाड़ियां 4 साल पहले ही खरीदी गई थी. ऐसे में नई गाड़ियां खरीदे जाने की कोई जरूरत नहीं थी.

मंत्रियों ने अपने आराम के लिए यह फैसला लिया है. मंत्रियों के लिए लग्जरी फॉर्च्यूनर खरीदे जाने से ज्यादा जरूरी बच्चों की शिक्षा के सुरक्षित इंतजाम किए जाने और उनकी स्कूल बिल्डिंग्स को ठीक कराया जाना जरूरी है.

कैबिनेट मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताते हुए पलटवार भी किया है. उनके मुताबिक नई गाड़ियां खरीदी जानी बेहद जरूरी थी. पुरानी गाड़ियों में मंत्रियों को दौरे करने में दिक्कत आ रही है. मौजूदा गाड़ियां तकरीबन 4 साल पुरानी हो चुकी हैं. ऐसे में वह बीच सफर कभी भी खराब हो सकती हैं.

उन्होंने कहा कि विपक्ष का एतराज पूरी तरह गलत है. नई फॉर्च्यूनर शौक नहीं बल्कि जरूरत है. मंत्री तेजी से जनता के बीच पहुंचेंगे तो उनके काम भी आसानी से होंगे. गौरतलब है कि राजस्थान के शिक्षा विभाग की तरफ से चार दिन पहले ही हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बताया गया कि राज्य के सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग्स को ठीक करने के लिए बीस हजार करोड़ रुपए की जरूरत है. यह भी बताया गया कि सरकार के पास फंड की कमी है और पूंजीपतियों व संस्थाओं से मदद मांगी जा रही है.