म्यांमार त्रासदी के लिए सहयोग दें ताकि आपदाग्रस्त म्यांमार के लोग अपने आपको दुवारा खड़ा कर सकें : भिक्षु नन्द रत्न

संकिसा / मैनपुरी : कुशीनगर से चलकर दस दिवसीय श्रामढेर प्रवज्जया शिविर शाक्य मुनि बुद्ध विहार, राजघाट संकिसा में पहुंचे बौद्ध भिक्षु डॉ. नन्द रत्न महाथेरो ने म्यांमार में आए भूकंप पर अपनी सवेंदना व्यक्त की है . उन्होंने कहा की म्यांमार में 28 मार्च को देश के इतिहास का सबसे घातक भूकंप आया, जिसने तबाही मचा दी. इस भूकंप की रिक्टर स्केल पर तीव्रता 7.7 रही और गहराई 10 किलोमीटर. यह भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह 11 बजकर 50 मिनट (लोकल समयानुसार 12 बजकर 50 मिनट) पर आया और इसके आते ही हाहाकार मच गया. इसके अलावा भारत, नेपाल, चीन और वियतनाम में भी म्यांमार में आए भूकंप का असर महसूस किया गया. भूकंप के कारण म्यांमार में मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने का सिलसिला अभी भी बना हुआ है. म्यांमार में भूकंप से सिर्फ जान का ही नहीं, माल का भी नुकसान हुआ. कई घरों-इमारतों, व्हीकल्स और सड़कों को इस भूकंप की वजह से भारी नुकसान हुआ। अभी भी देश में रह-रहकर आफ्टरशॉक्स आ रहे हैं. म्यांमार में भूकंप से अब तक 3,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. और लाखों लोग घायल हैं जिनका इलाज चल रहा है . इस महाविशाल भूकंप में म्यांमार की बौद्ध विरासत ( बौद्ध मंदिर , बौद्ध मठ , बौद्ध शिक्षा के केंद्र) भी नष्ट हो गए. वहीं थाईलैंड में भी इस वजह से करीब 36 लोगों की मौत हो चुकी है. वक़्त बीतने के साथ म्यांमार में आए भूकंप की और डरावनी तस्वीरें सामने आती जा रही हैं. भूकंप से थाईलैंड में नुक़सान कितना हुआ, ये तो काफ़ी हद तक साफ़ हो गया था. मगर म्यांमार में सेना की सरकार होने के कारण भी सटीक जानकारियां बाहर नहीं आ रही हैं.

ऐसे में भिक्षु डॉ. नन्द रत्न ने अपील की है की साधन सम्पन्न लोगों को म्यांमार जैसे देश के लिए कुछ न कुछ मदद करनी चाहिए ताकि म्यांमार दुवारा जीवंत हो सकें . म्यांमार के पीड़ित लोगों को भोजन , पानी , दवा , कपड़े , रहने के लिए आसियाना समय पर मिल सके . ऐसे में बौद्ध तीर्थ संकिसा में आगामी पांच अप्रैल को म्यांमार के राजनयिक आ रहे हैं उनके माध्यम से संकिसा से कुछ आर्थिक मदद भेजने की जरूरत है , इस लिए जनता जनार्दन सहयोग दे और नेक कार्य में अपनी भूमिका निभाए . इस कार्य के लिए भंते नन्द रत्न के फ़ोन पे वॉर कोड से पैसा भेज सकते हैं .

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