14 से 16 जुलाई 2025 के बीच प्रयागराज के विकास भवन में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में चार ब्लॉकों—चाका, सोरांव, कौड़िहार और बहादुरपुर—की 80 से अधिक स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यशाला का उद्देश्य महिला उद्यमियों को डिजिटल लेनदेन, वित्तीय प्रबंधन और व्यवसायिक कौशलों से सशक्त बनाना था। प्रतिभागियों में बैंक सखी, बुक कीपर, और सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRPs) शामिल थीं, जो जमीनी स्तर पर वित्तीय प्रणाली का संचालन करती हैं और अन्य महिलाओं को मार्गदर्शन देती हैं।
यह कार्यक्रम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के शोधकर्ताओं द्वारा संचालित किया गया और वैश्विक एनालिटिक्स कंपनी EXL के सहयोग से आयोजित किया गया। यह पहल न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में भी संचालित की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिला उद्यमियों को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। यह सहयोग अकादमिक गुणवत्ता और उद्योग विशेषज्ञता के समन्वय का उदाहरण है, जिससे प्रशिक्षण अधिक प्रासंगिक और व्यावहारिक बनता है।
प्रशिक्षण में बुक कीपिंग, मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल मार्केटप्लेस जैसे ONDC और अमेज़न पर उत्पादों की सूचीकरण, जीएसटी की मूल जानकारी, मूल्य निर्धारण और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीकों से सिखाया गया। सभी सत्रों में सहभागिता को प्रोत्साहित किया गया, और प्रतिभागियों को अपने व्यवसाय से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर भी दिया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन प्रयागराज की मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती हर्षिका सिंह (आईएएस), प्रोफेसर गौरव द्विवेदी (आईआईटी दिल्ली), और जिला व ब्लॉक स्तरीय मिशन प्रबंधकों की उपस्थिति में हुआ। श्रीमती हर्षिका सिंह ने कहा, “महिलाओं का आकर भाग लेना अपने आप में एक बड़ी बात है। अब जब आपने यह पहल की है, तो पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा, “सीखना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी है सीखे हुए का इस्तेमाल करना।”
प्रोफेसर गौरव द्विवेदी ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जो हम सिखा रहे हैं वह आपकी उद्यमिता की यात्रा में लागू भी हो।” उन्होंने प्रतिभागियों के उच्च स्तरीय सवालों की सराहना करते हुए कहा कि यह उनकी डिजिटल और वित्तीय समझ को दर्शाता है। प्रश्नों में जीएसटी दरों की तुलना, यूपीआई पंजीकरण में तकनीकी अड़चनें, और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव जैसे विषयों को लेकर जिज्ञासा दिखाई दी।
सभी महिलाओं ने तीनों दिन की कार्यशाला में पूरी सक्रियता के साथ भाग लिया और यह स्पष्ट रूप से व्यक्त किया कि वे सीखे गए उपकरणों और ज्ञान का अपने व्यवसाय में उपयोग करना चाहती हैं। यह देखकर प्रसन्नता हुई कि उनमें आत्मविश्वास, जिज्ञासा और आगे बढ़ने की प्रबल इच्छा शक्ति स्पष्ट रूप से झलक रही थी। सोरांव की अर्चना चौरसिया और बहादुरपुर की राधा त्रिवेदी जैसी प्रतिभागियों ने अपनी सक्रियता और व्यावसायिक समझ से विशेष रूप से सबका ध्यान आकर्षित किया। इन प्रतिभागियों ने न केवल ह र सत्र में भाग लिया, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनीं।
समापन सत्र में प्रतिभागियों को यह संदेश दिया गया कि “याद रखिए, आसमान ही सीमा है। आप सभी में वह क्षमता है।” इस कार्यशाला ने यह सिद्ध कर दिया कि सही प्रशिक्षण और समर्थन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल खुद को सशक्त बना सकती हैं, बल्कि अपने समुदाय में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। ऐसी पहलों से न केवल स्थानीय व्यवसायों को गति मिलती है, बल्कि महिला नेतृत्व को भी मजबूती मिलती है, जो सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
द दस्तक 24
प्रभारी पत्रकार तहसील कोरांव प्रयागराज उमाशंकर कुशवाहा 7571974858
