कमाई में BCCI के आगे नहीं टिकता पाकिस्तान, आंकड़े देख चौंक जाएंगे!

टी20 विश्व कप 2026 में हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। बांग्लादेश के भारत में न खेलने की जिद के बाद आईसीसी ने टीम को टूर्नामेंट से ही बाहर कर दिया। अब पाकिस्तान भी गीदड़भभकी दे रहा है कि वह भारत और श्रीलंका की मेजबानी में होने वाले टूर्नामेंट से नाम वापस लेने पर विचार कर सकता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने कहा है कि वह शुक्रवार या फिर दो फरवरी को अपना फैसला सुना देंगे। इस पर पाकिस्तान सरकार से बातचीत जारी है।

पाकिस्तान का इस मामले से कोई लेनादेना नहीं है। उसके मैच को हाईब्रिड मॉडल के अनुसार श्रीलंका में होने हैं, फिर भी किसी और के मामले में टांग अड़ाने की उसकी आदत गई नहीं है। हालांकि, पाकिस्तान की यह गीदड़भभकी, उन्हें ही काफी भारी पड़ सकती है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि आईसीसी का रेवेन्यू मॉडल बताते है। पाकिस्तान का ढोल पीटना कि वह नहीं खेलेगा के पीछे की असली सच्चाई कुछ और ही है। आइए जानते हैं…

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की सबसे प्रमुख रणनीति अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों पर राजनीतिक दबाव बनाने की रही है। चाहे भारत में होने वाले आईसीसी इवेंट हों या खुद उनके देश में आयोजित होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी, पीसीबी बार-बार बहिष्कार की संभावना जताकर एक तरह की वार्ता स्थिति बनाता है। पाकिस्तान की दलील यह होती है कि हमें बाहर करो तो आईसीसी की अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी, लेकिन जब इस दावे को आईसीसी के आधिकारिक वित्तीय मॉडल, प्रसारण आंकड़ों और वैश्विक क्रिकेट बाजार के 2025 के आंकड़ों पर रखा जाता है, तो तस्वीर अलग दिखती है। पाकिस्तान प्रभावशाली तो है, पर निर्णायक नहीं।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आईसीसी कोई फंडिंग क्लब नहीं, बल्कि इवेंट बिजनेस है। आईसीसी के लिए उसके इवेंट्स (विश्व कप, टी20 विश्व कप आदि) उसकी नकद मशीन हैं।

इसके 2024 के ऑडिटेड अकाउंट्स यह स्पष्ट करते हैं- 2024 में कुल राजस्व: 777.9 मिलियन यूएस डॉलर
इवेंट्स से राजस्व: 728.5 मिलियन यूएस डॉलर
नेट सरप्लस: 474 मिलियन यूएस डॉलर

इसके पिछले साल यानी साल 2023 में

कुल राजस्व: 904.4 मिलियन यूएस डॉलर
इवेंट्स से राजस्व: 839.2 मिलियन यूएस डॉलर
नेट सरप्लस: 596 मिलियन यूएस डॉलर

इन आंकड़ों से दो बातें निकलती हैं: आईसीसी का दबाव वहीं होगा जहां इवेंट की वैल्यू हिले। इसका मतलब है कि बॉयकॉट की धमकी तभी असरदार होती है जब वह टूर्नामेंट की कमर्शियल वैल्यू को छू सके।
आईसीसी राजस्व में पाकिस्तान का हिस्सा मायने रखता है, पर एक तय सीमा के साथ। 2024-27 डिस्ट्रिब्यूशन साइकिल के मुताबिक, पाकिस्तान को आईसीसी के रेवेन्यू का 5.75% हिस्सा मिलता है, जबकि भारत को 38.5%।
साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत से आईसीसी को कुल राजस्व का लगभग 80% मिलता है। 2024-27 आईसीसी मीडिया राइट्स (इंडियन मार्केट) का मूल्य, तीन बिलियन यूएस डॉलर यानी 27,540 करोड़ रुपये है।
यह अनुपात पीसीबी की स्थिति स्पष्ट कर देता है। पाकिस्तान आईसीसी का बड़ा सदस्य जरूर है, पर आर्थिक धुरी नहीं।