Monday, 14 September 2026 | 10:09 PM
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लखनऊ:विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण पर जताई आपत्ति, आरएफपी डॉक्यूमेंट को बताया "लूट का दस्तावेज"

लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 17 अगस्त 2025 विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन द्वारा तैयार किए गए पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण संबंधी आरएफपी डॉक्यूमेंट को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। समिति ने प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार
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लखनऊ:विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण पर जताई आपत्ति, आरएफपी डॉक्यूमेंट को बताया "लूट का दस्तावेज"
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लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 17 अगस्त 2025 विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन द्वारा तैयार किए गए पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण संबंधी आरएफपी डॉक्यूमेंट को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। समिति ने प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार से मांग की है कि इस दस्तावेज को मंजूरी न दी जाए और तत्काल निरस्त किया जाए।

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि आयोग ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो बिजली कर्मियों को नियामक आयोग कार्यालय पर मौन प्रदर्शन करना पड़ेगा।

★समझौते के उल्लंघन का आरोप

समिति ने याद दिलाया कि 05 अक्टूबर 2020 को अरविंद कुमार, जब वह यूपी पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष थे, ने संघर्ष समिति के साथ एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में स्पष्ट प्रावधान था कि बिजली कर्मियों को विश्वास में लिए बिना प्रदेश में किसी भी क्षेत्र का निजीकरण नहीं होगा। समिति का कहना है कि मौजूदा आरएफपी डॉक्यूमेंट को मंजूरी देना इस समझौते का खुला उल्लंघन होगा।

★"एक लाख करोड़ की संपत्ति मात्र 6500 करोड़ में"

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि ग्रांट थॉर्टन नामक ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट द्वारा तैयार किया गया यह दस्तावेज निजी घरानों के हित में बनाया गया है। आरोप लगाया गया है कि पॉवर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष और निदेशक वित्त निधि नारंग की मिलीभगत से एक लाख करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को मात्र 6500 करोड़ रुपए रिजर्व प्राइस पर बेचने की तैयारी है। समिति ने इसे “मेगा घोटाले” की संज्ञा दी।

★पहले भी हुआ नुकसान – टोरेंट पावर का उदाहरण

संघर्ष समिति ने आगरा शहर की बिजली व्यवस्था के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत टोरेंट पावर को काम सौंपा गया था, जहाँ कंपनी हर साल 800 करोड़ का मुनाफा कमा रही है, जबकि पावर कॉरपोरेशन को 1000 करोड़ का घाटा उठाना पड़ रहा है। समिति का कहना है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल निगमों का निजीकरण भी इसी तरह की लूट का रास्ता खोलेगा।

★निदेशक वित्त पर गंभीर आरोप

समिति ने यह भी आरोप लगाया कि निदेशक वित्त श्री निधि नारंग ने निजीकरण से जुड़ी 10 से अधिक फाइलों की छाया प्रति अपने पास रख ली है। समिति ने मांग की है कि उनका कक्ष सील किया जाए, अन्यथा गोपनीय दस्तावेज बाहर ले जाए जाने का खतरा है।

★संघर्ष समिति का अभियान

आज अवकाश के दिन समिति के पदाधिकारियों ने आपसी विचार-विमर्श कर निर्णय लिया कि प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों को निजीकरण के नाम पर हो रहे घोटाले और लूट से अवगत कराया जाएगा।

संघर्ष समिति का साफ कहना है कि यदि आयोग ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो प्रदेशभर में आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।