नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़)) 20 अगस्त 2025 राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार बुधवार को लोकसभा में तीन अहम बिल पेश करने वाली है, जिनमें सबसे चर्चित होगा 130वां संविधान संशोधन बिल। इस बिल के जरिये सरकार ने यह साफ संकेत दिया है कि अब गंभीर आपराधिक मामलों में दोषियों को सत्ता और मंत्री पद का सुख नहीं मिलेगा।
क्या है 130वें संविधान संशोधन बिल का प्रावधान?
इस बिल में प्रस्ताव रखा गया है कि यदि किसी मंत्री को पांच साल या उससे अधिक की सजा वाले संगीन अपराध में दोषी पाया जाता है और वह 30 दिन तक हिरासत में रहता है, तो उसका मंत्री पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।
यह प्रावधान न केवल मंत्रियों पर, बल्कि प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री पर भी लागू होगा। यानी अगर देश का कोई भी शीर्ष नेता गंभीर अपराध में फंसता है और जेल में 30 दिन तक रहता है, तो वह अपने पद पर बने रहने का हक खो देगा।
क्यों लाया जा रहा है यह बिल?
भारत की राजनीति में अपराधीकरण लंबे समय से एक गंभीर चिंता का विषय रहा है। चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर इस पर कड़ा रुख अपनाने की बात करते रहे हैं। संसद और विधानसभाओं में बड़ी संख्या में ऐसे नेता चुने जाते हैं, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। 2019 के आम चुनाव में 43% सांसदों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। इनमें से कई मुकदमे हत्या, अपहरण और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े थे। केंद्र सरकार का मानना है कि इस बिल के बाद राजनीति से अपराधियों की पकड़ ढीली होगी और जनता के बीच राजनीति की साख बढ़ेगी।
अन्य दो बिलों में क्या होगा?
हालांकि सबसे ज्यादा सुर्खियों में 130वां संविधान संशोधन बिल है, लेकिन इसके साथ सरकार दो और बिल पेश करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक इनमें शामिल हो सकते हैं:
1. जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन – ताकि चुनाव लड़ने के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं पर रोक लगाई जा सके।
2. लोकपाल-लोकायुक्त से जुड़े प्रावधानों में बदलाव – जिससे भ्रष्टाचार के मामलों में जांच और तेज हो सके।
विपक्ष का रुख
हालांकि विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह के प्रावधानों का दुरुपयोग भी हो सकता है। विपक्ष का तर्क है कि कई बार राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में झूठे मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं, जिससे किसी भी मंत्री को अस्थायी रूप से पद से हटाना आसान हो जाएगा। लेकिन सरकार का कहना है कि अदालत में दोष सिद्ध हुए बिना किसी पर कार्रवाई नहीं होगी।
निष्कर्ष
अगर संसद इस बिल को पास कर देती है तो यह भारतीय राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव साबित होगा। इससे मंत्रियों और नेताओं पर जवाबदेही बढ़ेगी और राजनीति को अपराधियों के चंगुल से निकालने की दिशा में यह मील का पत्थर होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल विपक्ष और सत्तापक्ष की सहमति से पास हो पाता है या फिर इसमें भी राजनीति हावी हो जाती है।
