नई दिल्ली:16 दिसंबर भारत की ऐतिहासिक विजय का प्रतीक — विजय दिवस।

नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 16 दिसंबर 2025 आज ही के दिन 16 दिसंबर 1971 को भारत ने इतिहास की सबसे निर्णायक और गौरवशाली सैन्य विजय हासिल की थी। भारत–पाकिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तान की पूर्वी सेना के कमांडर जनरल ए.ए.के. नियाज़ी ने भारतीय सेना की पूर्वी कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया था। इस ऐतिहासिक क्षण में पाकिस्तान के लगभग 93,000 सैनिकों ने टैंक, तोप, गोला-बारूद एवं अन्य अस्त्र-शस्त्रों सहित भारतीय सेना के सामने समर्पण किया।

यह सैन्य विजय केवल युद्ध में जीत नहीं थी, बल्कि यह भारत की सामरिक क्षमता, राजनीतिक दूरदर्शिता और कूटनीतिक कौशल का वैश्विक प्रमाण भी बनी। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के सशक्त नेतृत्व में भारत ने न केवल पाकिस्तान को निर्णायक पराजय दी, बल्कि दुनिया के मानचित्र पर एक नए राष्ट्र — बांग्लादेश — के उदय का मार्ग भी प्रशस्त किया। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम ने विश्व की महाशक्ति अमेरिका को भी अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करने को विवश कर दिया।

पाकिस्तान के दो टुकड़े होने और बांग्लादेश के स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित होने के साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। यह विजय भारतीय सेना के शौर्य, बलिदान और अनुशासन का अमर उदाहरण है।

इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सेना के अदम्य साहस को नमन करने और देशवासियों में राष्ट्रगौरव की भावना को सुदृढ़ करने का अवसर है।

विजय दिवस के अवसर पर सूबेदार राकेश कुमार सागर, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अनुजावि) ने समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने की प्रेरणा देता है।

विजय दिवस — भारतीय शौर्य, संकल्प और स्वाभिमान का प्रतीक।