नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 12 सितम्बर 2025 आज भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया जब वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और समाजसेवी श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने देश के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, कैबिनेट के कई वरिष्ठ मंत्रीगण, सांसद, न्यायपालिका के उच्च पदाधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
सी.पी. राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर
तमिलनाडु से आने वाले सी.पी. राधाकृष्णन भारतीय राजनीति के एक सशक्त और अनुभवी नेता माने जाते हैं। वे दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी समझ और सक्रिय भूमिका रही है। लंबे समय तक उन्होंने जनकल्याण, शिक्षा, ग्रामीण विकास और युवाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य किया है। राजनीति में उनकी छवि सादगी, ईमानदारी और संवादप्रिय नेतृत्व के रूप में स्थापित है।
उपराष्ट्रपति पद का महत्व
भारत का उपराष्ट्रपति न केवल राज्यसभा का सभापति होता है, बल्कि संवैधानिक दृष्टि से देश के दूसरे सर्वोच्च पद पर आसीन होता है। इस पद के साथ संवाद, समन्वय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी होती है।
सी.पी. राधाकृष्णन से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने अनुभव और सरल स्वभाव से राजनीतिक दलों के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देंगे और संसद की कार्यवाही को और अधिक गरिमामय बनाएंगे।
प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं की शुभकामनाएँ
शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर राधाकृष्णन को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “उनका अनुभव, संवेदनशीलता और लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता देश को नई दिशा देगी।” विपक्षी दलों के नेताओं ने भी उन्हें बधाई दी और लोकतंत्र को सशक्त करने में सहयोग की आशा व्यक्त की।
जनता की उम्मीदें
देशभर से शुभकामनाओं का तांता लगा हुआ है। आम नागरिकों और युवाओं का मानना है कि उनकी कार्यशैली लोकतांत्रिक संवाद और जनहित पर आधारित होगी। उनकी सादगीपूर्ण छवि से यह उम्मीद की जा रही है कि वे राजनीति में मर्यादा और सहिष्णुता को और गहराई देंगे।
निष्कर्ष
भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में सी.पी. राधाकृष्णन का शपथ ग्रहण केवल एक औपचारिक घटना नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के लिए नई ऊर्जा और दिशा का प्रतीक है। देश को विश्वास है कि उनके नेतृत्व में लोकतांत्रिक परंपराएँ और मजबूत होंगी, संवाद की संस्कृति और विकसित होगी तथा राष्ट्रहित का संकल्प और भी सशक्त बनेगा।
यह अवसर भारतीय राजनीति के लिए एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
