NASA का ‘गार्डियन’ सिस्टम स्पेस से सुनामी अलर्ट देगा, पढ़िए रिपोर्ट

अमेरिकी साइंटिस्ट्स स्पेस से सुनामी का पता लगाने वाले एक नए मॉनिटरिंग सिस्टम की टेस्टिंग कर रहे हैं। इस सिस्टम का नाम ‘गार्डियन’ रखा गया है। इसे पैसिफिक ओशन के रिंग ऑफ फायर में टेस्ट किया जा रहा है। 115 साल में (1900-2015 के बीच) इस इलाके में 750 से ज्यादा सुनामी आ चुकी है।

जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के साइंटिस्ट्स के मुताबिक, ‘गार्डियन’ का पूरा नाम GNSS अपर एटमॉस्फियर रीयल-टाइम डिजास्टर इंफॉर्मेशन एंड अलर्ट सिस्टम है। ये ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) और सैटेलाइट से मिले रीयल-टाइम डेटा के मुताबिक काम करता है।
समुद्र के अंदर भूकंप, जमीन धंसने या ज्वालामुखी फटने से जब बड़ी तेज हलचल होने लगती है तो उसमें तूफान जैसा उठता है। इससे लंबी और बहुत ऊंची लहरों उठना शुरू हो जाती हैं। इन्हीं लहरों को सूनामी कहते हैं। ये लहरें जबरदस्त तेजी के साथ आगे बढ़ती हैं। कई बार इनकी स्पीड 800 किलोमीटर प्रति घंटे होती है।

‘गार्डियन’ सिस्टम को पुराने वॉर्निंग सिस्टम के एडवांस रूप की तरह देखा जा रहा है। ये सुनामी आने से पहले डिस्प्लेस हुई हवा और आयनोस्फियर (आयनमंडल) से टकराने वाले चार्जड पार्टिकल्स को ऑब्जर्व करता है। आयनोस्फियर, पृथ्वी के वायुमंडल का सबसे बहारी हिस्सा होता है।
दरअसल, जब लहरें उठती हैं तो हवा का एक हिस्सा डिस्प्लेस हो जाती है। डिस्प्लेस हुई ये हवा लो-फ्रिक्वेंसी साउंड ग्रैविटी वेव्स के रूप में फैल जाती है। नासा का कहना है कि ये वेव्स और चार्जड पार्टिकल्स नैविगेशनल सैटेलाइट के सिग्नल्स को तोड़ देते हैं। इन बदलावों को ही अलर्ट की तरह देखा जा सकता है।
जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के साइंटिस्ट्स लियो मार्टायर ने कहा- सिग्नल के टूट जाने को हमने सैटेलाइट की कमी के तौर पर नहीं देखा। बल्कि इसे हम प्राकृतिक खतरे के अलर्ट डेटा के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। साइंटिस्ट्स का कहना है कि ये अब तक सबसे तेज मॉनिटरिंग सिस्टम है। ये आयनोस्फियर से टकराने वाले चार्जड पार्टिकल्स को ऑब्जर्व करने के 10 मिनट के अंदर अलर्ट जारी कर देगा
रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है जहां कई कॉन्टिनेंटल के साथ ही ओशियनिक टेक्टॉनिक प्लेट्स भी हैं। ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है, सुनामी उठती है और ज्वालामुखी फटते हैं। इस रिंग ऑफ फायर का असर न्यूजीलैंड से लेकर जापान, अलास्का और उत्तर व साउथ अमेरिका तक देखा जा सकता है। दुनिया के 90% भूकंप और 78% सुनामी इसी रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में आती हैं।
यह क्षेत्र 40 हजार किलोमीटर में फैला है। दुनिया में जितने सक्रिय ज्वालामुखी हैं, उनमें से 75% इसी क्षेत्र में हैं। रिंग ऑफ फायर का असर 15 देशों- जापान, रूस, फिलिपींस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, कनाडा, अमेरिका, मैक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पेरू, इक्वाडोर, चिली और बोलिविया में है।