नगीना (उप्र)। आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नगीना लोकसभा सांसद एडवोकेट चंद्रशेखर ने हाथरस (बूलगढ़ी) की दलित बेटी मनीषा वाल्मीकि के साथ हुए सामूहिक बलात्कार एवं हत्या प्रकरण में न्यायालयों के आदेशों के पालन न होने पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।
सांसद चंद्रशेखर ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय (19 जुलाई 2022) तथा उच्चतम न्यायालय (22 मार्च 2023) ने पीड़िता के परिवार की सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास को लेकर जो निर्देश दिए थे, उनका आज तक पालन नहीं किया गया है। उन्होंने इसे “न्यायिक आदेशों की अवमानना” और “दलित समाज की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा” बताया।
🔹 हाईकोर्ट के आदेश — 19 जुलाई 2022
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मनीषा वाल्मीकि प्रकरण की गंभीरता, परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे—पीड़िता के किसी एक परिजन को सरकारी नौकरी देने का आदेश। परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने पर विचार। उनके सम्मान, सुरक्षा और पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात। लेकिन सांसद के अनुसार इन आदेशों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
🔹 सुप्रीम कोर्ट का आदेश — 22 मार्च 2023
राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने पर सुप्रीम कोर्ट ने 22 मार्च 2023 को याचिका खारिज कर दी थी, जिससे यह आदेश अंतिम रूप से लागू हो गया था।
फिर भी, सांसद का कहना है कि “सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पालन नहीं किया, जो अत्यंत चिंताजनक है।”
🔹 सांसद चंद्रशेखर की मांग
अपने पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि- न्यायालय के आदेशों का तत्काल पालन सुनिश्चित कराया जाए। पीड़िता के परिवार को सुरक्षा, सम्मान एवं पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए जिन्होंने न्यायालयी आदेशों को नजरअंदाज किया।
🔹 पीड़िता परिवार की सुरक्षा और न्याय पर बड़ा सवाल
सांसद ने कहा कि आदेशों की अवहेलना न सिर्फ न्यायिक व्यवस्था का अपमान है बल्कि दलित समाज के संवैधानिक अधिकारों पर भी गंभीर चोट है। इसलिए सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाना चाहिए।
यह मुद्दा एक बार फिर हाथरस कांड को सुर्खियों में ले आया है, और अब राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय एवं हाईकोर्ट के आदेशों का जल्द से जल्द पालन कराए।
