महाबोधि बुद्ध विहार मुक्ति मोर्चा एटा ने दिया ज्ञापन

कल दिनांक 26 मार्च, 2025 को राष्ट्रपति और राज्यपाल, बिहार प्रदेश के नाम जिलाधिकारी, एटा को बोधगया के महाबोधि बुद्ध विहार की मुक्ति हेतु ज्ञापन दिया गया। यह ज्ञापन महाबोधि बुद्ध विहार मुक्ति मोर्चा एटा के तत्वावधान में दिया गया। मोर्चे में हर जाति से, हर समुदाय से और एटा नगर तथा पूरे जनपद से 200 से अधिक लोग शामिल हुए। सभी लोग जिलाधिकारी आवास के सामने निर्धारित धरना-स्थल पर इकट्ठे हुए। बुद्धिजीवियों और सामाजिक चिंतकों ने बौद्ध धर्म और महाबोधि महाविहार की मुक्ति पर अपने विचार रखे।

सबसे पहले प्रोफेसर राम सिंह ने विचार रखे और बताया कि बुद्ध के करुणा और समता के विचारों के बिना व्यक्ति में आंतरिक, समाज में, राष्ट्र में और विश्व में शांति सम्भव नहीं है। शांति के बिना विकास संभव नहीं है। सम्राट अशोक महान के शासनकाल में विश्व की जीडीपी में भारत का हिस्सा 35% था। हर्षवर्धन और पालों के शासन के बाद भारत का विकास बाधित होने लगा था। बुद्ध का जन्म लुंबिनी में सिद्धार्थ के रूप में हुआ किन्तु करुणानिधान भगवान बुद्ध बोधगया में ही बने। इसलिए बोधगया का महाविहार मूलरूप में सुरक्षित रहना और बोधगया का प्रबंधन बौद्धों को देना जरूरी है। पूर्व प्रधानाचार्य गंगा सहाय वर्मा ने कहा कि पूरे भारत में जितने भी बड़े मंदिर हैं, सभी बौद्ध विहारों को बदलकर बनाए गए हैं।

सुनीता शाक्य ने कहा कि बिहार प्रदेश और केंद्र की सरकार भगवान बुद्ध की करुणा दिखाते हुए बोधगया बौद्धों को सौंप दे, अन्यथा संघर्ष के रास्ते पर चलकर हम स्वयं ले लेंगे। चंद्रकांत गांधी ने कहा कि बुद्ध को मानने वाले ही देश में बहुसंख्यक हैं। हिन्दू धर्म जबरदस्ती में बनाया गया धर्म है। सपा के नेता सत्यभान शाक्य ने कहा कि सरकार बदलकर समतावादी सरकार सत्ता में लाकर ही बोधगया को मुक्त कराया जा सकता है। सावित्रीबाई फुले जनकल्याण संस्था की महासचिव शशिप्रभा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बोधगया को मुक्त कराने का यह संघर्ष लम्बे समय से चल रहा है और अभी आगे भी लम्बा चलने वाला है। पूर्व विधायक ममतेश शाक्य ने कहा कि इस आंदोलन के साथ सभी जातियों और सभी वर्गों के लोग जुड़ रहे हैं। इसलिए बोधगया जल्द ही मुक्त होकर रहेगा। फहीमुद्दीन वारसी, पुष्पेन्द्र बघेल, आदि ने भी अपने विचार रखे और बोधगया की मुक्ति हेतु आह्वान किया।

इसी बीच ज्ञापन लेने के लिए नायब तहसीलदार धरना स्थल पर आए और बताया कि मंडलायुक्त के आगमन के कारण जिलाधिकारी का आना सम्भव नहीं है। इस पर मोर्चा के पदाधिकारियों ने एडीएम या एसडीएम को भेजने की मांग रखी। तत्पश्चात एसडीएम धरना स्थल पर आए और ज्ञापन लिया।

अंत में मोर्चे के अध्यक्ष एडवोकेट केशव सिंह शाक्य ने सभी का धन्यवाद दिया और भविष्य में संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा। साथ ही उपस्थित जनसमूह से आग्रह किया कि वे अगली बार अपने साथियों के साथ अधिक संख्या में उपस्थित हों। तभी शासन और प्रशासन पर दबाव अधिक बनेगा और वह बोधगया की मुक्ति हेतु कदम उठाएंगे। धरना स्थल पर एडवोकेट योगेश कुमार, कुंवरसेन शाक्य, चंद्र पाल सिंह, वीरेंद्र सिंह शाक्य, प्रोफेसर ओंकार नाथ मौर्य, एडवोकेट देशराज शाक्य, एडवोकेट हाकिम सिंह शाक्य, संजय शाक्य सहित 200 से ज्यादा लोग उपस्थित रहे।

कल दिनांक 26 मार्च, 2025 को राष्ट्रपति और राज्यपाल, बिहार प्रदेश के नाम जिलाधिकारी, एटा को बोधगया के महाबोधि बुद्ध विहार की मुक्ति हेतु ज्ञापन दिया गया। यह ज्ञापन महाबोधि बुद्ध विहार मुक्ति मोर्चा एटा के तत्वावधान में दिया गया। मोर्चे में हर जाति से, हर समुदाय से और एटा नगर तथा पूरे जनपद से 200 से अधिक लोग शामिल हुए। सभी लोग जिलाधिकारी आवास के सामने निर्धारित धरना-स्थल पर इकट्ठे हुए। बुद्धिजीवियों और सामाजिक चिंतकों ने बौद्ध धर्म और महाबोधि महाविहार की मुक्ति पर अपने विचार रखे।

सबसे पहले प्रोफेसर राम सिंह ने विचार रखे और बताया कि बुद्ध के करुणा और समता के विचारों के बिना व्यक्ति में आंतरिक, समाज में, राष्ट्र में और विश्व में शांति सम्भव नहीं है। शांति के बिना विकास संभव नहीं है। सम्राट अशोक महान के शासनकाल में विश्व की जीडीपी में भारत का हिस्सा 35% था। हर्षवर्धन और पालों के शासन के बाद भारत का विकास बाधित होने लगा था। बुद्ध का जन्म लुंबिनी में सिद्धार्थ के रूप में हुआ किन्तु करुणानिधान भगवान बुद्ध बोधगया में ही बने। इसलिए बोधगया का महाविहार मूलरूप में सुरक्षित रहना और बोधगया का प्रबंधन बौद्धों को देना जरूरी है। पूर्व प्रधानाचार्य गंगा सहाय वर्मा ने कहा कि पूरे भारत में जितने भी बड़े मंदिर हैं, सभी बौद्ध विहारों को बदलकर बनाए गए हैं।

सुनीता शाक्य ने कहा कि बिहार प्रदेश और केंद्र की सरकार भगवान बुद्ध की करुणा दिखाते हुए बोधगया बौद्धों को सौंप दे, अन्यथा संघर्ष के रास्ते पर चलकर हम स्वयं ले लेंगे। चंद्रकांत गांधी ने कहा कि बुद्ध को मानने वाले ही देश में बहुसंख्यक हैं। हिन्दू धर्म जबरदस्ती में बनाया गया धर्म है। सपा के नेता सत्यभान शाक्य ने कहा कि सरकार बदलकर समतावादी सरकार सत्ता में लाकर ही बोधगया को मुक्त कराया जा सकता है। सावित्रीबाई फुले जनकल्याण संस्था की महासचिव शशिप्रभा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बोधगया को मुक्त कराने का यह संघर्ष लम्बे समय से चल रहा है और अभी आगे भी लम्बा चलने वाला है। पूर्व विधायक ममतेश शाक्य ने कहा कि इस आंदोलन के साथ सभी जातियों और सभी वर्गों के लोग जुड़ रहे हैं। इसलिए बोधगया जल्द ही मुक्त होकर रहेगा। फहीमुद्दीन वारसी, पुष्पेन्द्र बघेल, आदि ने भी अपने विचार रखे और बोधगया की मुक्ति हेतु आह्वान किया।

इसी बीच ज्ञापन लेने के लिए नायब तहसीलदार धरना स्थल पर आए और बताया कि मंडलायुक्त के आगमन के कारण जिलाधिकारी का आना सम्भव नहीं है। इस पर मोर्चा के पदाधिकारियों ने एडीएम या एसडीएम को भेजने की मांग रखी। तत्पश्चात एसडीएम धरना स्थल पर आए और ज्ञापन लिया।

अंत में मोर्चे के अध्यक्ष एडवोकेट केशव सिंह शाक्य ने सभी का धन्यवाद दिया और भविष्य में संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा। साथ ही उपस्थित जनसमूह से आग्रह किया कि वे अगली बार अपने साथियों के साथ अधिक संख्या में उपस्थित हों। तभी शासन और प्रशासन पर दबाव अधिक बनेगा और वह बोधगया की मुक्ति हेतु कदम उठाएंगे। धरना स्थल पर एडवोकेट योगेश कुमार, कुंवरसेन शाक्य, चंद्र पाल सिंह, वीरेंद्र सिंह शाक्य, प्रोफेसर ओंकार नाथ मौर्य, एडवोकेट देशराज शाक्य, एडवोकेट हाकिम सिंह शाक्य, संजय शाक्य सहित 200 से ज्यादा लोग उपस्थित रहे।

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