लखनऊ:यूपी में बिजली कर्मियों का हल्लाबोल, निजीकरण प्रक्रिया निरस्त करने की मांग तेज

लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 01 सितंबर 2025 विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की चल रही प्रक्रिया को प्रबंधन और निजी घरानों की मिलीभगत करार देते हुए इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की है। समिति ने कहा कि निजीकरण की तैयारी स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 के आधार पर की जा रही है, जिसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि यह दस्तावेज पूरी तरह निजी कंपनियों के पक्ष में तैयार किया गया है। सूत्रों के हवाले से समिति का कहना है कि निजीकरण लागू होने के बाद भी सरकार को निजी कंपनियों को 5 से 7 साल तक ट्रांजिशन सपोर्ट के नाम पर अरबों-खरबों रुपये की वित्तीय सहायता देनी पड़ेगी। इसके साथ ही सस्ती दरों पर बिजली आपूर्ति भी करनी होगी। यदि कंपनियां मुनाफे में नहीं आतीं, तो यह अवधि और भी बढ़ाई जा सकती है।

उपभोक्ताओं और सरकार पर बढ़ेगा बोझ

समिति ने चेतावनी दी कि निजी कंपनियों को बेहद कम दाम पर जमीन दी जाएगी, घाटे और देनदारियों का बोझ सरकार अपने ऊपर लेगी और कर्मचारियों की सेवान्त सुविधाओं का खर्च उपभोक्ताओं के टैरिफ पर डाला जाएगा। यानी घाटा सरकार पर और मुनाफा कंपनियों को।

दस्तावेज बदलने पर सवाल

समिति ने खुलासा किया कि जब ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट का चयन हुआ था तब निजीकरण की प्रक्रिया स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 पर आधारित थी, लेकिन आरएफपी डॉक्यूमेंट तैयार होते-होते इसे बदलकर 2025 संस्करण पर कर दिया गया। समिति ने सवाल उठाया कि बिना सार्वजनिक चर्चा और पारदर्शिता के ऐसा क्यों किया गया।

लगातार 278वें दिन विरोध

समिति के आह्वान पर प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी आज लगातार 278वें दिन भी विरोध प्रदर्शन करते रहे। समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं, किसानों और कर्मचारियों को अंधेरे में रखकर निजीकरण थोपना चाहती है, जिससे बिजली महंगी होगी और सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।