लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 02 अगस्त 2025 उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को बंद करने के खिलाफ आम आदमी पार्टी (AAP) ने राजधानी लखनऊ में एक ज़बरदस्त और जनभावनाओं से जुड़ा प्रदर्शन किया। ‘स्कूल बचाओ आंदोलन’ के तहत हुए इस प्रदर्शन का नेतृत्व AAP के राज्यसभा सांसद श्री संजय सिंह ने किया। इस आंदोलन का उद्देश्य साफ़ है— “मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए”, यानि सरकार को शिक्षा के क्षेत्र को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि उसे कमजोर करने की कोशिश करनी चाहिए।
सरकार के फैसले पर विरोध क्यों?
उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा हाल ही में एक आदेश जारी कर हजारों सरकारी स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का तर्क है कि कम संख्या वाले विद्यालयों को समेकित किया जाएगा, लेकिन आम आदमी पार्टी और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय ग्रामीण और पिछड़े वर्ग के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने जैसा है।
संजय सिंह ने अपने भाषण में तीखे शब्दों में कहा:“उत्तर प्रदेश में शिक्षा का मजाक उड़ाया जा रहा है। एक ओर दिल्ली में केजरीवाल सरकार हर मोहल्ले में शानदार स्कूल खोल रही है, वहीं यूपी की भाजपा सरकार स्कूल बंद कर रही है। ये बच्चे के भविष्य पर सीधा हमला है।”
‘मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए’
AAP कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था —
“मधुशाला नहीं, पाठशाला चाहिए”,
“शिक्षा बचाओ, स्कूल बचाओ”,
“बच्चों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं सहेंगे”।
इस नारे के पीछे की भावना स्पष्ट है — जनता अब अपने बच्चों के भविष्य के लिए खड़ी हो चुकी है। गाँवों और कस्बों में जिन स्कूलों को बंद करने की तैयारी है, वहां के गरीब और दलित बच्चों के लिए यही स्कूल एकमात्र शैक्षणिक सहारा हैं।
शिक्षा नहीं रुकेगी, आंदोलन जारी रहेगा
आम आदमी पार्टी ने साफ शब्दों में ऐलान किया है कि जब तक सरकार स्कूल बंद करने की प्रक्रिया को वापस नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन पूरे प्रदेश में जारी रहेगा। संजय सिंह ने कहा: “हम सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेंगे। उत्तर प्रदेश के हर गाँव, हर ब्लॉक में यह आंदोलन पहुंचेगा। भाजपा को यह समझना होगा कि शिक्षा से खिलवाड़ अब नहीं चलेगा।”
दिल्ली मॉडल बनाम यूपी मॉडल
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में किए गए व्यापक सुधारों को पूरे देश ने सराहा है। नए भवन, डिजिटल कक्षाएं, प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक और विदेशों में पढ़ने जा रहे छात्र— ये दिल्ली के सरकारी स्कूलों की पहचान बन चुकी है। वहीं यूपी में सरकारी स्कूलों की दुर्दशा और अब उन्हें बंद करने की योजना, एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
आगामी रणनीति
आम आदमी पार्टी ने ऐलान किया है कि वह आगे जिला स्तर पर भी ‘स्कूल बचाओ जनसभाएं’ आयोजित करेगी। पार्टी का लक्ष्य है कि लोगों को इस आंदोलन से जोड़ा जाए और यह साबित किया जाए कि शिक्षा का सवाल किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि हर परिवार और हर बच्चे का है।
निष्कर्ष:
आज जब दुनिया ज्ञान और नवाचार की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे समय में सरकारी स्कूलों को बंद करना केवल शिक्षा के अधिकार का हनन नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य के साथ भी अन्याय है।
AAP का संदेश स्पष्ट है — “शिक्षा बचेगी, तभी प्रदेश का भविष्य बचेगा।”
