लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 19 अक्टूबर 2025 रविवार बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं और पूर्व सांसद बहन कु. मायावती जी ने आज लखनऊ में पार्टी की आल इंडिया बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड को छोड़कर देश के अन्य सभी राज्यों के संगठनात्मक हालात और जमीनी तैयारियों की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।
इस अहम बैठक में बहन मायावती जी ने राज्यवार पार्टी की स्थिति की गहन समीक्षा करते हुए पार्टी संगठन को सशक्त बनाने, सर्वसमाज में जनाधार बढ़ाने और राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए कई ठोस दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि “बहुजन समाज की मुक्ति तभी संभव है जब सत्ता की मास्टर चाबी उनके अपने हाथों में होगी।”
🔹 संगठन विस्तार और जनाधार बढ़ाने पर जोर
बहन मायावती जी ने कहा कि बी.एस.पी. को मजबूत करने के लिए देशभर में पार्टी कार्यकर्ताओं को गांव-गांव तक सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने मान्यवर कांशीराम जी के 19वें परिनिर्वाण दिवस (9 अक्टूबर 2025) को लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय महा आयोजन की ऐतिहासिक सफलता का विशेष उल्लेख किया और कहा कि “उत्तर प्रदेश में जिस जोश, उमंग और समर्पण के साथ लाखों कार्यकर्ता शामिल हुए, उसी जोश की जरूरत अन्य राज्यों को भी है।”
उन्होंने कहा कि जब तक बहुजन समाज सत्ता की मास्टर चाबी अपने हाथों में नहीं लेगा, तब तक शोषण, अत्याचार और सामाजिक अन्याय से मुक्ति संभव नहीं है।
🔹 सामाजिक व आर्थिक असमानता पर गहरी चिंता
बैठक में देश में बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, महिला असुरक्षा, जातिवाद, साम्प्रदायिकता और भ्रष्टाचार के मामलों पर बहन मायावती जी ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकारें संकीर्ण जातिवादी और राजनीतिक स्वार्थ में इतनी लिप्त हैं कि देश का स्वाभाविक विकास और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकारें संविधान के जनकल्याणकारी उद्देश्यों को प्राथमिकता नहीं देंगी, तब तक आम जनता का जीवन संकट में रहेगा।
🔹 संवैधानिक मूल्यों पर खतरा — गंभीर घटनाओं पर टिप्पणी
बहन मायावती जी ने हाल ही में देश में हुई कुछ घटनाओं, जैसे —देश के प्रधान न्यायाधीश के साथ कोर्ट में हुई अभूतपूर्व अप्रिय घटना, और हरियाणा में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की जातिवाद से प्रेरित आत्महत्या —
पर गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि ये घटनाएँ देश के संवैधानिक ढांचे और सभ्य समाज दोनों के लिए अत्यंत चिंताजनक हैं।
उन्होंने कहा कि इन मामलों में सरकार और संस्थाओं की उदासीनता यह दर्शाती है कि कानून के राज की भावना को कमजोर किया जा रहा है, जिस पर सख्त कार्रवाई और राष्ट्रीय विमर्श की आवश्यकता है।
🔹 बी.एस.पी. की राजनीति — “संविधान की आत्मा के अनुरूप”
मायावती जी ने स्पष्ट कहा कि बी.एस.पी. अन्य राजनीतिक दलों की तरह पूंजीपतियों और धनिक वर्गों पर आधारित पार्टी नहीं है, बल्कि यह एक अम्बेडकरवादी, मानवतावादी और जनकल्याणकारी सोच वाली पार्टी है।
उन्होंने कहा कि बी.एस.पी. का उद्देश्य समाज के गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े, मुस्लिम और अन्य वंचित वर्गों को संविधान प्रदत्त अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा और सम्मान दिलाना है।
यूपी में बी.एस.पी. सरकारों की उपलब्धियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि “हमारी सरकारों ने कानून द्वारा ‘कानून के राज’ को सख्ती से लागू कर यह दिखाया कि सही नीयत से शासन कैसे चलता है।”
🔹 जनसहयोग और आर्थिक आत्मनिर्भरता का संदेश
बैठक के अंत में बहन मायावती जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे 15 जनवरी (उनके जन्मदिन) पर आर्थिक सहयोग की परंपरा को जारी रखें।
उन्होंने कहा कि “बी.एस.पी. किसी पूंजीपति की नहीं, बल्कि जनता के सहयोग से चलने वाली पार्टी है — जो बहुजन समाज को ‘लेने वाले से देने वाला समाज’ बनाने का सपना देखती है।”
🔹 कार्यकर्ताओं में जोश और प्रतिबद्धता
बैठक में देशभर से आए बी.एस.पी. पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने लखनऊ आयोजन की ऐतिहासिक सफलता के लिए बहन मायावती जी को बधाई दी और विश्वास दिलाया कि वे उनके संदेशों को गांव-गांव तक पहुँचाएंगे।
सभी ने अपने-अपने राज्यों में पार्टी जनाधार बढ़ाने और बी.एस.पी. को सत्ता में साझेदारी दिलाने के लिए पूरे समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प लिया।
बहन मायावती जी ने अंत में सभी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि “यह संघर्ष केवल सत्ता का नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान और सामाजिक न्याय का आंदोलन है, जिसे मिशन की भावना से आगे बढ़ाना होगा।”
बी.एस.पी. की यह आल इंडिया बैठक न केवल संगठनात्मक समीक्षा का मंच बनी, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि बहुजन आंदोलन का मूल लक्ष्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है — “सत्ता की मास्टर चाबी अपने हाथ में लेकर ही बहुजन समाज का उद्धार संभव है।”
