लखनऊ:योगी सरकार के स्कूल मर्जर के फैसले के खिलाफ जन आंदोलन: स्वामी प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में सरकार को झुकना पड़ा

लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 01 अगस्त 2025 उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा प्रदेश भर के प्राथमिक विद्यालयों को स्कूल मर्जर की नीति के तहत बंद किए जाने के फैसले के विरोध में जबरदस्त जन आंदोलन खड़ा हुआ। इस जन विरोधी, शिक्षा विरोधी और गरीब विरोधी निर्णय के खिलाफ अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री माननीय स्वामी प्रसाद मौर्य जी के नेतृत्व में हज़ारों कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में विधान सभा के सामने सड़क पर बैठकर ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन किया।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस निर्णय को संविधान विरोधी बताते हुए कहा कि यह सरकार गरीब, दलित, पिछड़े, ग्रामीण और वंचित समाज के बच्चों की शिक्षा के अधिकार को समाप्त करने पर तुली है।

जिलास्तरीय प्रदर्शन और जन समर्थन

लखनऊ में हुए प्रदर्शन के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में 8 जुलाई को जिला मुख्यालयों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया। जनता का आक्रोश और कार्यकर्ताओं का जोश सरकार के इस फैसले के खिलाफ स्पष्ट संकेत दे रहा था। इसके बाद 26 जुलाई से 31 अगस्त तक प्रदेश के हर ब्लॉक स्तर पर बंद किए गए स्कूलों पर पहुंचकर गांव की गरीब जनता के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की जा रही है।

जन संघर्ष ने बदला सरकार का फैसला

लगातार बढ़ते जनदबाव और विपक्ष के मुखर विरोध के चलते अंततः योगी सरकार को अपना निर्णय वापस लेने के लिए बाध्य होना पड़ा। यह संघर्ष लोकतंत्र में जनता की ताकत और एक मजबूत जननेता की भूमिका को दर्शाता है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक पड़ाव है, अंत नहीं। “जब तक अंतिम व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार नहीं मिल जाता, और जब तक गांव-गांव के स्कूल फिर से नहीं खुलते, यह संघर्ष जारी रहेगा।”

निष्कर्ष:

स्वामी प्रसाद मौर्य जी का यह आंदोलन साबित करता है कि “झुकती हैं सरकारें, लेकिन झुकाने वाला चाहिए।” जब नेतृत्व ईमानदार हो, जनता संगठित हो और मकसद जनहित का हो, तब सत्ता को भी फैसले बदलने पर मजबूर होना पड़ता है। यह जन आंदोलन उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक चेतना में एक नया अध्याय जोड़ चुका है।