लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 05 जुलाई 2025 कभी-कभी एक घटना पूरे समाज को इंसानियत का आईना दिखा देती है। लखनऊ में एक ऐसी ही घटना सामने आई जिसने न सिर्फ भावुक कर दिया बल्कि पुलिस के मानवीय चेहरे को भी उजागर किया।
घटना एक बुज़ुर्ग व्यक्ति की लंबी बीमारी के चलते मृत्यु से जुड़ी है। उनका जीवनसाथी पहले ही इस दुनिया से विदा हो चुका था, और अब पीछे रह गई थी सिर्फ एक इकलौती बेटी—जो पिता के अंतिम संस्कार के लिए भी आर्थिक रूप से असमर्थ थी।
टूटे हुए दिल से किया 112 पर कॉल
सहायता की आखिरी उम्मीद में बेटी ने 112 डायल किया। इस एक कॉल ने मानवता की मिसाल गढ़ दी। सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस की टीम मौके पर पहुँची। न केवल सांत्वना दी, बल्कि पूरी संवेदनशीलता के साथ हालात को समझा।
पुलिसकर्मियों ने खुद निभाया बेटी का फर्ज
बिना एक पल गंवाए, पुलिसकर्मियों ने अपनी जेब से अंतिम संस्कार की संपूर्ण व्यवस्था करवाई। शव वाहन से लेकर लकड़ियों की व्यवस्था तक का खर्च उन्होंने स्वयं वहन किया।
यहीं नहीं रुके। उन्होंने खुद उस अर्थी को कंधा दिया, जो उस बेटी के लिए अकेले उठाना संभव नहीं था।
देश को चाहिए ऐसे प्रहरी
यह घटना साबित करती है कि पुलिस सिर्फ कानून की रक्षक नहीं, बल्कि समाज की असली ताकत है। इस कठिन समय में मानवता को जीने वाले ये पुलिसकर्मी वाकई असली हीरो हैं।
जनता कर रही सलाम
स्थानीय लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी इन पुलिसकर्मियों की सराहना की जा रही है। लोग कह रहे हैं, “जय सम्राट, जय अशोक शासन, जय संविधान”, क्योंकि यही हैं असली भारतीय मूल्यों के रक्षक।
समापन में एक सवाल
अगर हर कोई ऐसे मानवीय दृष्टिकोण से कार्य करे — तो क्या कोई मजबूर अकेला रह जाएगा?
