लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 07 दिसंबर 2025 उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक चर्चित और विवादित विभागों में शुमार राज्य कर (GST) विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस एम. देवराज को उनके पद से हटा दिए जाने के बाद प्रशासनिक और कारोबारी गलियारों में तेज़ हलचल मच गई है। जहां एक ओर जीएसटी विभाग के अफसरों और व्यापारियों के एक बड़े वर्ग ने राहत की सांस ली है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी आक्रामक कार्रवाई को लेकर बहस भी तेज हो गई है।
आईएएस एम. देवराज ने अपने महज 16 महीने के कार्यकाल में जीएसटी विभाग की जड़ जमा चुकी कथित अफसर-व्यापारी भ्रष्ट तंत्र पर सीधा प्रहार किया। विभागीय सूत्रों के अनुसार उन्होंने 500 से अधिक ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की, जिनके संबंध किसी न किसी ब्यूरोक्रेट, मंत्री, विधायक या जज के रिश्तेदारों से बताए जाते हैं। बरसों से मलाईदार पोस्टिंग पर जमे अफसरों के तबादले किए गए, दो अधिकारियों को बर्खास्त, 60 से अधिक को निलंबित और 400 से ज्यादा को चार्जशीट व शो-कॉज नोटिस जारी किए गए।
वीआरएस, गोपनीय जांच और रियल-टाइम निगरानी
देवराज की सख्ती का असर यह रहा कि सात अधिकारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली। कई अफसरों की संपत्तियों की गोपनीय जांच कराई गई और 10 साल से लंबित ग्रेडेशन लिस्ट को सार्वजनिक किया गया।
सबसे ज्यादा चर्चा में रही उनकी वह व्यवस्था, जिसमें पान मसाला और लोहा इकाइयों के बाहर 24 घंटे सचल दलों की निगरानी शुरू की गई। विभागीय मुख्यालय में लगाए गए एक बड़े टीवी स्क्रीन पर करीब 30 जिलों की फैक्ट्रियों के गेट पर लगे कैमरों की रियल-टाइम फुटेज देखी जाती थी। माना जाता है कि एम. देवराज स्वयं इस निगरानी पर लगातार नजर रखते थे।
विवाद और आरोप
हालांकि, उनकी इस सख्त कार्यशैली को लेकर विवाद भी कम नहीं रहे। विभागीय अधिकारियों के एक वर्ग ने उन पर जातिगत पक्षपात के आरोप लगाए और कहा कि उन्होंने एससी-एसटी वर्ग के अधिकारियों को ज्यादा प्रभावशाली पोस्टिंग दी। यह भी आरोप लगे कि उन्होंने अधिकारी संगठनों से कोई संवाद नहीं किया, एकतरफा कार्रवाई की और कई मामलों में सुनवाई का मौका नहीं दिया।
इसके अलावा, छोटे व्यापारियों को बड़े पैमाने पर कुर्की नोटिस भेजे जाने, छुट्टियों में भी अधिकारियों से काम लेने और 24-24 घंटे की ड्यूटी जैसी शिकायतों ने सरकार की परेशानी बढ़ाई। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि छोटे व्यापारियों के खिलाफ की गई कई कार्रवाइयों के पीछे विभाग के भीतर मौजूद कॉकस और दलालों का खेल था, जो देवराज की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे थे।
राजस्व वसूली और बड़ा सवाल
एम. देवराज की ईमानदार छवि के बावजूद यह भी तथ्य सामने आया कि उनकी सख्ती के चलते यूपी की जीएसटी राजस्व वसूली प्रभावित हुई और राज्य फिलहाल इस मामले में बिहार से भी पीछे बताया जा रहा है। इसी को आधार बनाकर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए गए।
एक अधिकारी संगठन ने तो उनके खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया था और हटाने की मांग की थी। अब वही संगठन देवराज के कार्यकाल में लिए गए फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।
नई जिम्मेदारी, नई चुनौती
एम. देवराज की जगह अब आईएएस कामिनी चौहान रतन को राज्य कर विभाग का नया प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि क्या वे टैक्स चोरी पर लगाम कस पाएंगी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रख सकेंगी। साथ ही, उन्हें विभाग के भीतर सक्रिय अफसरों के कॉकस से बचते हुए संतुलन भी साधना होगा।
एम. देवराज भले ही पद से हट गए हों, लेकिन उन्होंने जीएसटी विभाग में एक ऐसी लकीर खींच दी है जिसे मिटाना आसान नहीं। अब यह देखना होगा कि नई नेतृत्व में यह लकीर और गहरी होती है या फिर धुंधला पड़ जाती है।
