लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 06 अक्टूबर 2025 मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश श्री नवदीप रिणवा ने 06 अक्टूबर, 2025 को अपने कार्यालय में प्रदेश के पते पर पंजीकृत उन राजनैतिक दलों की सुनवाई की, जिन्होंने पिछले छह वर्षों में आयोजित लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाग लेने के बाद भी अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट, अंशदान रिपोर्ट और निर्वाचन व्यय विवरणी निर्धारित समय सीमा तक प्रस्तुत नहीं की थी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रत्येक दल द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया और उनके मोबाइल नंबर, पंजीकरण संख्या, वर्तमान पता एवं ईमेल की भी जांच की। इस अवसर पर 127 दलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
सोमवार को 30 दलों को सुनवाई के लिए बुलाया गया था, जिनमें से 16 दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इन दलों ने अपने दल के वित्तीय वर्षों 2021-22, 2022-23 और 2023-24 की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट और निर्वाचन व्यय विवरणी प्रस्तुत की।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि चुनाव में भाग लेने वाले सभी राजनैतिक दलों के लिए यह अनिवार्य है कि वे हर वर्ष 30 सितंबर तक अपनी अंशदान रिपोर्ट और 31 अक्टूबर तक ऑडिट रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत करें। इसके अलावा, लोकसभा चुनाव के 90 दिनों और विधानसभा चुनाव के 75 दिनों के भीतर अपने आय-व्यय का विवरण देना भी सभी दलों के लिए अनिवार्य है।
उन्होंने सभी दलों के प्रतिनिधियों से पार्टी के ईमेल, मोबाइल नंबर और वर्तमान पते को अपडेट रखने के निर्देश भी दिए ताकि समय-समय पर आयोग की जानकारी और निर्देश उपलब्ध कराए जा सकें।
सुनवाई में शामिल प्रमुख दलों में आदर्श समाज पार्टी (आगरा), भारतीय सुहेलदेव जनता पार्टी (बलिया), आम जनता पार्टी (बस्ती), अपना दल बलिहारी पार्टी (बस्ती), आम जनता पार्टी इंडिया (गोंडा), आधुनिक भारत पार्टी (कानपुर नगर), बहुजन पार्टी (कानपुर नगर), एक्शन पार्टी (खीरी), अपना दल यूनाइटेड पार्टी (कुशीनगर), अभय समाज पार्टी (महराजगंज), भारतीय हरित पार्टी (मुजफ्फरनगर), अम्बेडकर युग पार्टी (प्रयागराज), बहुजन आवाम पार्टी (प्रयागराज), अपना देश पार्टी (सुल्तानपुर), अंजान आदमी पार्टी (प्रयागराज) और आजाद भारत पार्टी (डेमोक्रेटिक, कानपुर नगर) शामिल थे।
07 अक्टूबर को अवकाश होने के कारण जिन दलों की सुनवाई होनी थी, वह अब 08 और 09 अक्टूबर को होगी। 08 अक्टूबर को 45 दलों और 09 अक्टूबर को 52 दलों की सुनवाई की जाएगी।
इस सुनवाई से राजनैतिक दलों के वित्तीय पारदर्शिता और निर्वाचन प्रक्रिया में ईमानदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
