Friday, 30 October 2026 | 6:42 PM
उत्तर प्रदेश

तक्षशिला के बारे में जानें

तक्षशिला :   ( पालि  : तक्कसिला) प्राचीन  भारत  में  गांधार  देश की  राजधानी  और शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। यहाँ का  विश्वविद्यालय  विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में शामिल है। यह  हिन्दू  एवं  बौद्ध  दोनों के लिये महत्व का केन्द्र था।  चाणक्य  यहाँ पर आचार्य थे। ४०५ ई में  फाह्यान  यहाँ आया थ
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तक्षशिला  के बारे में  जानें
तक्षशिला :  (पालि : तक्कसिला) प्राचीन भारत में गांधार देश की राजधानी और शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। यहाँ का विश्वविद्यालय विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में शामिल है। यह हिन्दू एवं बौद्ध दोनों के लिये महत्व का केन्द्र था। चाणक्य यहाँ पर आचार्य थे। ४०५ ई में फाह्यान यहाँ आया था। अब हमारी खबरें यूट्यूब चैनल पर भी  देखें । नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें । https://www.youtube.com/channel/UC4xxebvaN1ctk4KYJQVUL8g अब हमारी ख़बरें एप्लीकेशन पर भी उपलब्ध हैं । हमारा एप्लीकेशन गूगल प्ले स्टोर से अभी डाउनलोड करें और खबरें पढ़ें । https://play.google.com/store/apps/details?id=com.dastak24.newsapp&hl=en ऐतिहासिक रूप से यह तीन महान मार्गों के संगम पर स्थित था- उत्तरापथ - वर्तमान ग्रैण्ड ट्रंक रोड, जो गंधार को मगध से जोड़ता था, उत्तरपश्चिमी मार्ग - जो कापिश और पुष्कलावती आदि से होकर जाता था, सिन्धु नदी मार्ग - श्रीनगर, मानसेरा, हरिपुर घाटी से होते हुए उत्तर में रेशम मार्ग और दक्षिण में हिन्द महासागर तक जाता था। वर्तमान समय में तक्षशिला, पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के रावलपिण्डी जिले की एक तहसील तथा महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है जो इस्लामाबाद और रावलपिंडी से लगभग ३२ किमी उत्तर-पूर्व में स्थित है। ग्रैंड ट्रंक रोड इसके बहुत पास से होकर जाता है। यह स्थल १९८० से यूनेस्को की विश्व विरासत सूचीमें सम्मिलित है। वर्ष २०१० की एक रिपोर्ट में विश्व विरासत फण्ड ने इसे उन १२ स्थलों में शामिल किया है जो अपूरणीय क्षति होने के कगार पर हैं। इस रिपोर्ट में इसका प्रमुख कारण अपर्याप्त प्रबन्धन, विकास का दबाव, लूट, युद्ध और संघर्ष आदि बताये गये हैं।

उत्खनन (खुदाई) एवं पुरातत्व

प्राचीन तक्षशिला के खंडहरों को खोज निकालने का प्रयन्त सबसे पहले जनरल कनिंघम ने शुरू किया था, किंतु ठोस काम 1912 ई0 के बाद ही भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में शुरू हुआ और अब उसके कई स्थानों पर छितरे हुए अवशेष खोद निकाले गए हैं। लगता है, भिन्न भिन्न युगों में नगर विदेशी आक्रमणों के कारण ध्वस्त होकर नई बस्तियों के रूप में इधर-उधर सरकता रहा। उसकी सबसे पहली बस्ती पाकिस्तान के रावलपिंडी जिले में भीर के टीलों से, दूसरी बस्ती रावलपिंडी से 22 मील उत्तर सिरकप के खंडहरों से और तीसरी बस्ती उससे भी उत्तर सिरसुख से मिलाई गई है। ये बस्तियाँ क्रमश: पाँचवी और दूसरी शती ईसवी पूर्व के बीच दूसरी और पहली शती ईसवी पूर्व के बीच (यूनीनी बाख्त्री युग) तथा पहली शती ईसा पूर्व और पहली ईसवी शती के मध्य (शक-कुषण युग) की मानी जाती हैं। खुदाइयों में वहाँ अनेक स्तूपों और विहारों (विशेषत: कुणाल विहार) के चिह्न मिले हैं.