कानपुर बुद्धा पार्क विवाद: शिवालय पार्क बनाने का प्रस्ताव हुआ रद्द, महापौर ने किया ऐलान।

कानपुर:(द दस्तक 24 न्यूज़) 02 सितंबर 2025 इंदिरा नगर स्थित बुद्धा पार्क में “शिवालय पार्क” बनाने की नगर निगम की योजना पर शहर से लेकर प्रदेश स्तर तक उठा राजनीतिक और सामाजिक तूफान आखिरकार थम गया। लगातार हो रहे विरोध के बाद मंगलवार को महापौर प्रमिला पांडेय ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि बुद्धा पार्क में अब किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा और नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिवालय पार्क के लिए दूसरी जगह चिन्हित की जाए।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

नगर निगम की योजना थी कि बुद्धा पार्क को परिवर्तित कर यहां शिवालय पार्क बनाया जाए। इसके लिए करीब 15 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था और 12 ज्योतिर्लिंग (प्रोटोटाइप) स्थापित करने की योजना थी। पिछले गुरुवार को नगर आयुक्त सुधीर कुमार ने भी बुद्धा पार्क का निरीक्षण किया था।

जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक हुआ, विरोध की लहर तेज हो गई। बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट करके इसका विरोध जताया। उन्होंने कहा कि बुद्धा पार्क दलितों और पिछड़े वर्ग की भावनाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसका नाम और स्वरूप बदलना अस्वीकार्य है।

इसी क्रम में भीम आर्मी प्रमुख व सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने भी सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई। स्थानीय पार्षद नीरज मौर्य समेत कई संगठनों ने भी इसका विरोध शुरू कर दिया।

सपा ने भी दिखाई सक्रियता

मामला धीरे-धीरे प्रदेश की सियासत का मुद्दा बनने लगा। सोमवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सपा महानगर अध्यक्ष हाजी फजल महमूद से पूरे प्रकरण की जानकारी मांगी। उन्होंने रिपोर्ट में बताया कि बुद्धा पार्क लगभग 33 एकड़ में फैला है और 1997 में यहां गौतम बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गई थी।

नगर निगम और केडीए की उपेक्षा से पार्क के पिछले हिस्से में जंगल उग आया है। निगम ने करीब 12 एकड़ क्षेत्र में शिवालय पार्क बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। सपा ने इसको पिछड़े और अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं को साधने की कोशिश के रूप में देखा और विरोध की तैयारी तेज कर दी थी।

महापौर का कदम और विवाद का पटाक्षेप

मंगलवार को महापौर प्रमिला पांडेय ने प्रस्ताव खारिज करते हुए कहा कि बुद्धा पार्क का स्वरूप जस का तस रहेगा। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि अब शिवालय पार्क के लिए दूसरी जगह खोजी जाए।

इस निर्णय के साथ ही बुद्धा पार्क मामले में खड़ा हुआ सियासी बवंडर शांत हो गया और शहर को संभावित टकराव से बचा लिया गया।

निष्कर्ष

बुद्धा पार्क को लेकर खड़ा हुआ विवाद इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों से जुड़ी परियोजनाओं को लेकर जनता की भावनाएं बेहद संवेदनशील होती हैं। जनविरोध और विपक्षी दलों की सक्रियता के चलते नगर निगम को अपने फैसले पर पीछे हटना पड़ा। अब देखना होगा कि नगर निगम शिवालय पार्क के लिए कौन सी नई जगह चिन्हित करता है और इस पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।