गुजरात:(द दस्तक 24 न्यूज़) 07 दिसंबर 2025 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रदीप शर्मा को एक विशेष अदालत ने धन शोधन के मामले में दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष की सश्रम कैद तथा 50 हजार रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई है। यह फैसला सरकारी जमीन को रियायती दर पर एक निजी कंपनी को आवंटित करने से जुड़े मामले में आया है।
मामला वर्ष 2003 से 2006 के बीच का है, जब प्रदीप शर्मा गुजरात के कच्छ जिले में जिला कलेक्टर के पद पर तैनात थे। आरोप था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी जमीन को नियमों के खिलाफ निजी कंपनी को कम दर पर आवंटित किया, जिससे राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और इस पूरे लेन-देन में धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के तत्व पाए गए।
जांच एजेंसियों द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद मामला विशेष अदालत में पहुंचा, जहां अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोप साबित किए। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से निष्पक्षता और कानून के पालन की अपेक्षा की जाती है, लेकिन इस प्रकरण में सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर प्रमाण सामने आए हैं।
अदालत ने प्रदीप शर्मा को 5 वर्ष की कैद के साथ 50,000 रुपये के आर्थिक दंड से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान रखा गया है।
इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय स्पष्ट करता है कि पद चाहे कितना भी ऊंचा क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है।
