साल 1975 में एक ऐसी फिल्म ने सिनेमाघरों में दस्तक दी थी, जिसने रिलीज होती ही तहलका मचा दिया था. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. लेकिन एक एक्टर की तो सिर्फ एक डायलॉग ने किस्मत चमका दी थी हम जिस एक्टर की बात कर रहे हैं, वो हैं बॉलीवुड के खुंखार विलेन अमजद खान. उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी हैं, लेकिन शोले में उन्होंने जो रोल निभाया उसे लोग कभी नहीं भूल पाए.फिल्म में अमजद के डायलॉग तो अमर हो गए थे. उनके कई ऐसे डायलॉग हैं, जो लोगों को आज भी याद हैं. यूं तो शोले का हर डायलॉग अपने आप में एक मिसाल है. लेकिन फिल्म का एक डायलॉग, पचास पचास कोस दूर तक कोई बच्चा रोता है तो मां कहती है कि सो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगा. ये डायलॉग कुछ ज्यादा ही पसंद किया गया था.
27 जुलाई 1992 को जब अमजद खान का निधन हुआ, उस वक्त भी हर किसी की जुबान पर सिर्फ उनका गब्बर वाला किरदार ही था. आज भी ‘सो जा बेटा नहीं तो गब्बर आ जाएगा’ जैसा डायलॉग सुनते ही सबसे पहले अमजद खान का चेहरा सामने आता है. अमजद खान को एक्टिंग विरासत में मिली थी. उनके पिता जयंत खुद फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर विलेन रह चुके थे.लेकिन उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में गब्बर का रोल निभाकर इतिहास रच दिया था.
पटकथा लेखक सलीम खान उन्हें थिएटर में परफॉर्म करते हुए देखकर ‘शोले’ के लिए गब्बर का रोल ऑफर किया था. अमजद ने ये ऑफर सुनते ही हामी दे दी ती. इस रोल के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज भी टीवी, कॉमेडी शोज़ और रियलिटी शोज़ में गब्बर का अंदाज़ अक्सर दिख ही जाता है. अमजद खान ने भले कई फिल्मों में विलेन बने, लेकिन ‘गब्बर’ जैसी ऊंचाई शायद ही कोई एक्टर कभी छू पाए. फिल्मों में ज्यादातर नेगेटिव रोल निभाने के बाद भी वह कभी टाइपकास्ट नहीं हुए. नेगेटिव रोल के जरिए ही उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में बड़ी पहचान बनाई थी. लेकिन असल जिंदगी में वह बहुत नरमदिल इंसान थे.
