ना सतयुग ना त्रेता भैया।
ना द्वापर ना कलयुग।।
सबसे सुन्दर युग आया भैया।
नाम हवै अम्बेडकर युग।।
साथियों आज चर्चा करने का विषय है किसान सम्मान निधि पर,
साथियों जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि क्या वास्तव में किसान सम्मान निधि किसानों के लिए बहुत ही राहत पूर्ण निधि है,
तो मैं आप सभी किसान भाइयों का ध्यान इस किसान सम्मान निधि योजना की ओर खींच कर बताना चाहता हूं कि इस रहस्य क्या है,
जैसा कि आप सभी लोगों को पता है कि सरकार द्वारा देश के किसानों को प्रति वर्ष एक किसान को छह हजार रुपए साल में किसान सम्मान निधि दिया जाता है,
और जिस हिसाब से किसान सम्मान निधि दी जा रही है, अगर देखा जाए तो इस हिसाब से अगर छह हजार रुपए को बारह भागों में बांट दिया जाए तो, पांच सौ रुपए महीना हुआ ,
और अगर पांच सौ रुपए का हिसाब प्रति दिन के हिसाब से किसान सम्मान निधि का लगाया जाए, तो पांच सौ रुपए महीना को तीस दिन में बांट दिया जाए तो इस हिसाब से होता है, लगभग सोलह रुपए प्रति दिन,
अब आप लोग जरा सोचिए कि हमारे देश भारत में किसानों को मिलता है किसान सम्मान निधि सोलह रुपए प्रति दिन के हिसाब से, अब आप लोग ही बताएं कि यह किसान सम्मान योजना चलाया जा रहा है कि, भिखारी सम्मान योजना,
आज की तारीख में अगर आप किसी भिखारी से कहो कि भाई मै तुम्हें सोलह रुपए प्रति दिन के हिसाब से दूंगा, तो क्या तुम भीख मांगोगे, तो हमारे ख्याल से आपको यही जवाब मिलेगा कि भाई तुम ही भीख मांगो, तुम मांग सकते हो, मैं तो नहीं मांग सकता , क्योंकि आज की तारीख में सोलह रुपए में तो सुबह का नाश्ता भी नहीं मिलता है,
तो आप लोग ही बताएं कि इस देश में अन्न दाता किसानों को कितना सम्मान मिलता है, कुछ कहने कि आवश्यकता नहीं है,
लेकिन सोचने की बात यह है कि हमारे देश भारत में ही, दूसरी व्यवस्था है,
वह व्यवस्था यह है कि यदि कोई सांसद या विधायक लगातार चालीस दिन तक सांसद या विधायक रहता है तो उसे आजीवन पेंशन मिलती है, वह भी छह हजार रुपए सालीना के हिसाब से नहीं, लगभग लाखों रुपए महीना के हिसाब से, जिसका अगर पूरे साल का हिसाब लगाया जाए तो होता है, बारह लाख रुपए प्रति वर्ष, और रोज का हिसाब लगाया जाए तो एक लाख रुपए में तीस दिन का भाग करने पर होता है लगभग तैंतीस सौ यानी कि तीन हजार तीन सौ रुपए प्रति दिन, अब आप लोग ही विचार करें,
और तो और आगे देखिए कि इसी कड़ी में चालीस साल तक नौकरी करने वाले लोगों कि पेंशन बन्द कर दी जा रही है, और पुरानी पेंशन जो बंद कर दी गई है, उसे बहाल करने के लिए जब लोग अपनी मांग को लेकर शान्ति पूर्वक प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें दौड़ा दौड़ा कर लाठियों से पुलिस के द्वारा पिटवाया जाता है,
और किसान सारी उम्र गुजार देते हैं, लेकिन उसको सोलह रुपए प्रति दिन पेंशन दी जा रही है, और किसान जब अपने किसी भी मांगों को लेकर शान्ति पूर्वक प्रदर्शन करने जाते हैं, तो उन्हें भी पुलिस द्वारा दौड़ा दौड़ा कर पीटा जाता है, और यहा तक कि उन किसानों से बात करने कि बात तो दूर,किसानों के ऊपर थार गाड़ी चढ़ा कर उन्हें मौत के घाट भी उतार दिया जाता है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
अम्बेडकर युग पार्टी
उमाशंकर कुशवाहा पंडित
